परेशानी. एसडीओ के भौतिक सत्यापन के बाद मिलता है लाइसेंस
बक्सर : दीपावली आते ही शहर में पटाखों की दुकानें सजने लगी हैं, जिले में पटाखों का कारोबार करीब एक करोड़ से अधिक का होता है. यह व्यवसाय महज दो दिनों का होता है. इसमें बचे पटाखे छठ के वक्त काम आते हैं. शहर व अनुमंडल क्षेत्र के प्रखंडों से अनुमंडल विभाग में पटाखा विक्रेताओं ने लाइसेंस लेने के लिए आवेदन जमा किया है, जिनके आवेदन पर एसडीओ द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद इन्हें लाइसेंस निर्गत कर दिया गया है. फिलहाल, बक्सर अनुमंडल में कुल 60 दुकानें लगाने की अनुमति दी गयी है.
क्या है नियम : विस्फोटक अधिनियम 1984 और विस्फोटक विनियम 2008 के अध्याय सात में आतिशबाजी की स्थायी व अस्थायी दुकानों के लिए नियम हैं. होलसेल लाइसेंसधारक इनका पालन करने के लिए बाध्य हैं.
भले ही उन्होंने स्थायी या अस्थायी लाइसेंस लिया है. नियम 83 के अनुसार पटाखा बिक्री की स्थायी दुकान कंक्रीट से बनी हुई हो. आकार नौ वर्गमीटर से ज्यादा और 25 वर्गमीटर से कम होना चाहिए. दुकान में कोई बिजली उपकरण, लैंप, बैटरी या चिनगारी पैदा करनेवाला सामान नहीं होना चाहिए.
जगह हो, जहां अग्निशमन वाहन तत्काल पहुंच सकें.
एक नजर में
जिले में 60 पटाखा दुकानदारों को मिला है लाइसेंस.
पिछले साल की अपेक्षा इस बार लाइसेंस कम दिये गये हैं.
पिछले साल की तुलना में इस साल पटाखा व्यवसाय का कारोबार कम है.
बिना लाइसेंस के चलायी जा रही हैं 200 से अधिक दुकानें
पटाखों के नये ट्रेंड : योगी पटाखा, रंगीली रॉकेट, इलेक्ट्रिक प्राइम स्पार्की, शिल्पा शेट्ठी रॉकेट, जय सरस्वती रॉकेट, शिव बुलेट, मुर्गा छाप ब्रांड, फुली ग्रीन, फ्लावर अनार
मानक के अनुसार सारी व्यवस्थाएं कर रखीं हैं. लाइसेंस के लिए अप्लाई करने के बावजूद भी अब तक जिला प्रशासन ने लाइसेंस नहीं दिया है, जिससे व्यवसाय पर असर पड़ेगा.
रमेश प्रसाद जायसवाल
पिछले साल की अपेक्षा पटाखा की बिक्री काफी कम हो रही है. लाइसेंस नहीं मिलने की वजह से पटाखा की बिक्री नहीं कर पा रहे हैं. इससे व्यवसाय पर असर पड़ रहा है.
राजू कुमार
इस साल पटाखे का व्यवसाय घाटे का व्यवसाय साबित हो रहा है. पहले से स्टॉक मंगाया गया था, लेकिन जिन लोगों को लाइसेंस नहीं मिला, वे पटाखे की खरीदारी नहीं कर पा रहे हैं. इससे घाटा लग रहा है.
असलम
नियम का पालन हर हाल में करना होगा
बिना अनुमति के विस्फोटक बेचने पर दुकानदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी. हर दुकानदार को लाइसेंस लेना हाेगा व नियमों का पालन करना होगा. भौतिक सत्यापन के बाद लाइसेंस दिया जाता है.
गौतम कुमार, अनुमंडलाधिकारी, बक्सर
