चौसा/राजपुर : रविवार की सुबह सोनपा गांव के लोगों के लिए काला दिन साबित हुआ. एक की जान बचाने के लिए तीन लोगों की जान असमय काल के गाल में समा गयी. कुएं से निकली जहरीली गैस ने तीन लोगों की जान ले ली. छह घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी जिंदगियां नहीं बचायी जा सकीं. इस घटना के बाद गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है. कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले. एक साथ गांव से तीन अरथियां निकलीं. चारों तरफ चीख पुकार मची हुई है. ग्रामीणों ने इतनी बड़ी त्रासदी कभी नहीं देखी थी. घटना की सूचना प्रशासन को दी गयी.
मौके पर सीओ चौसा, थानाध्यक्ष राजपुर, डीएसपी शैशव यादव मेडिकल टीम के साथ पहुंचे थे. कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने एक शव को बाहर निकाला. रविवार की देर शाम तक अन्य शवों को निकालने का प्रयास जारी रहा. लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गयी थी, जिससे शवों को निकालने में काफी परेशानी हो रही थी. प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीम को घटनास्थल पर बुलाया.
बेटे की असमय मौत से एकदम टूट गये शिवमुनि : कुएं में जहरीली गैस के चलते अपने बेटे को तो बचा लिया, लेकिन स्वयं को नहीं बचा पया कमेश्वर सिंह. जब इसकी खबर कमेश्वर के पिता शिवमुनि को मिली, तो वे हक्के-बक्के रह गये. बेटे की मौत से इस कदर टूट गये है कि उनकी जुबान से कोई शब्द नहीं निकल रहा है. वे कहते थे कि ओकरा जायेके के पहिले हमहीं कांहे ना चल गइनी हा. अब हमरा परिवार के बाल बच्चन के का होई. उधर कमेश्वर की पत्नी भागीरथी देवी का पति के नहीं रहने की खबर के बाद से ही हालत खराब है
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हमार बचियन-बचवन के अब का होई ऐ दादा : इस घटना में अपने पति को खोनेवाली भरत राम की पत्नी सरस्वती देवी का रो-रोकर बुरा हाल है.
आसपास की महिलाएं उन्हें सांत्वना दे रही थीं. रोते-रोते अचानक बेहोश हो जा रही थी. फिर जब होश आता, तो अपनी 16 साल की बेटी बंदना,10 साल की अंशु व सात साल के बेटा सुबांशु को देख कर चिल्लाने लगती इ का हो गइल ए दादा, अब हमार बचीयन आ बचवा अब कदसे रहिहन. अबे त घर से खेते आइल रहुअन. कहकर फिर बेहोश हो जाती थी. भरत की तीन बेटियां व एक बेटा है एक बेटी आरती की शादी कर दिया था परंतु दो बेटी व एक बेटा के साथ किस प्रकार जिंदगी कटेगी यही शोच कर बार बार बेहोश हो जा रही थी.
बाप समेत तीन लोगों की मौत देख सहम सा गया ईश्वर : सोनपा गांव में कुएं में लगी अपनी बोरिंग चालूकरने गया ईश्वर अपनी मौत को मात देकर आंखों के सामने अपने पिता समेत तीन लोगों की मौत देखकर अब भी सहमा हुआ है.
घटना के तीन घंटे तक एकदम शांत बैठा हुआ था और कुछ भी कहने को तैयार नहीं था. करीब बारह बजे ईश्वर बड़ी हिम्मत जुटा पाया और घटना का वृतांत जब सुनाया, तो लोगों की रूह कांप उठी. उसने बताया कि सबसे पहले सुबह करीब आठ बजे वह अपने घर के बाहर स्थित कुएं में लगी बोरिंग को चालू करने गया, लेकिन उसमें कुछ खराबी होने के कारण वह कुएं में उतरकर देखने लगा और कुएं से निकलनेवाली विषैली गैस के प्रभाव में आकर बेहोश हो कर कुएं में गिर गया. उसे बचाने के लिए उसके पिता कामेश्वर कुशवाहा(40 वर्ष) ने सबसे पहले कोई में प्रवेश किया.
उसके बाद एक-एक कर कुल पांच लोग कुएं में प्रवेश कर गये. कुएं में गये लोगों में गांव के ही जंग बहादुर सिंह (45वर्ष) पिता – राम बदन सिंह, भरत राम (50 वर्ष) पिता- स्व. लालमुनि राम, मोहन राम (50 वर्ष) पिता हरि नारायण राम, जय प्रकाश राम उर्फ जेपी (45 वर्ष)पिता -रामेश्वर राम शामिल हैं. मोहन तथा जय प्रकाश बाहर चले आये, जिनकी हालात अभी भी खराब. घटना स्थल पर लोगों की काफी भीड़ जमा हो गयी. घटना के बारे में जैसे ही लोग उससे कुछ पूछते वह पुरी तरह सहम जा रहा है.
अब कइसे जिनगी कटी हो राम : सोनपा गांव में कुआं में डूबने से हुई जंगबहादुर भी अपने परिवार का इकलौता पालनहार था. उसके दो बेटे सुनील व कृष्णा तथा दो बेटियां आरती व अर्चना हैं.
पत्नी आशा देवी की चीत्कार व दहाड़ मार कर रोने से काफी लोग मर्माहत हैं. बताते हैं कि जंगबहादुर काफी मेहनती था. मजदूरी व खेती से अपने परिवार को बखूबी चलाता था. उसके नहीं रहने से बाल बच्चों की परवरिश कैसे होगा यही चिंता को लेकर आशा बार-बार बेहोश हो जाती थी और कहती कि अब बचवन आ बचियन के का होई. कइसे जिनगी कटी हो राम.
एक साथ छीन गयीं तीन-तीन परिवारों की खुशियां : सोनपा गांव में घर के बाहर एक कुएं में लगी बोरिंग में आयी तकनीकी खराबी को ठीक करने कुएं में उतरे एक युवक को बचाने के दरम्यान एक-एक कर तीन लोगों की मौत गयी. एक साथ तीन लोगों की मौत से पूरे गांव में कोहराम मच गया और एक साथ तीन-तीन परिवारों के घर मातम पसरा हुआ है.
मौत का कुआं बना राजपुर के सोनपा गांव का कुआं
जो कुएं लोगों को जीवन देने का काम करते थे, वे अब मौत के कुआं बन चुके हैं. बक्सर जिले के चौसा प्रखंड के सोनपा गांव में एक कुएं में जहरीला गैस निकलने से बड़ा हादसा हो गया है. गांव के पूर्व दिशा में स्थित कुएं में तीन लोगों की मौत हो जाने के बाद से लोग अब यही कह रहे हैं कि जो कुएं कभी जीवन जीने में मदद करते थे, आज वे ही कुआं मौत बन कर गांवों में स्थित हैं.
बता दें कि तीनों व्यक्ति बोरिंग चलाने के लिए कुएं के अंदर गये थे. बाहर नहीं निकले, तो लोगों को शक हुआ. चौथा व्यक्ति वहां पहुंचा, तो उसे कुछ समझ में नहीं आया. उसने अन्य लोगों को मदद के लिए बुलाया. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है. बोरिंग का बंद होल खोलने के दौरान वहां जहरीली गैस निकलने से वे लोग बेहोश हुए होंगे. एसपी राकेश कुमार ने तीन लोगों की मौत की पुष्टि की. वहीं, डीएसपी ने कहा कि मशक्कत से एक को बचा लिया गया है.
शव को निकालने में ऑक्सीजन के लगे पांच सिलिंडर
कुएं से जहरीली गैस का इतना रिसाव हो रहा था कि किसी को अंदर जाने की हिम्मत नहीं थी. मौके पर पहुंची मेडिकल टीम ने ऑक्सीजन के पांच सिलिंडर लगाये. इसके बाद पाइप से कुएं में ऑक्सीजन डाला गया, जिसके बाद गांव के एक युवक ने किसी तरह कुएं में घुसकर तीनों शवों को बाहर निकाला. इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम देने में छह घंटे का समय लग गया.
शव निकालने से पहले की जांच
चेंबर में पड़े शव को बाहर निकालने से पहले पहुंचे चिकित्सकों की टीम में डॉ अरुण कुमार श्रीवास्तव, डॉ जयप्रकाश भारती ने लालटेन जलाकर अंदर किया, जिसमें लालटेन जाते ही गैस के प्रभाव में आकर उसका कांच फूट गया. इसके बाद गैस को बाहर निकालने के लिए दो पंखा को अंदर चलाया गया. साथ ही ऑक्सीजन के पांच सिलिंडरों को डाला गया. वहीं, मौके पर मौजूद फायर ब्रिगेड की गाड़ी से लेकर सीढ़ी को नीचे जाने के लिए डाला गया. इस पूरी प्रक्रिया के बाद शेष दो शवों को बाहर निकाला गया.
