बाढ़पीड़ितों की सहायता के लिए जायेगी टीम

बक्सर : उत्तरी बिहार में बाढ़ रूपी विभीषिका से एक करोड़ से ज्यादा लोगों का जीवन तबाह हो चुका है. वहां रहनेवाले लोगों की खरबों की संपत्ति पानी में बह गया है. यह विभीषिका अधवारा नदी जलसमूह के कारण प्रतिवर्ष उत्तरी बिहार के निवासियों को झेलना पड़ता है. उत्तरी बिहार में बाढ़ की विभीषिका से […]

बक्सर : उत्तरी बिहार में बाढ़ रूपी विभीषिका से एक करोड़ से ज्यादा लोगों का जीवन तबाह हो चुका है. वहां रहनेवाले लोगों की खरबों की संपत्ति पानी में बह गया है. यह विभीषिका अधवारा नदी जलसमूह के कारण प्रतिवर्ष उत्तरी बिहार के निवासियों को झेलना पड़ता है. उत्तरी बिहार में बाढ़ की विभीषिका से तबाह लोगों की सहायता के लिए भाजपा जिलाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह के नेतृत्व में जिले में एनडीए की घटक दलों के सहयोग से बाढ़पीड़ित सघन सहायता संपर्क अभियान की शुरुआत की गयी.
अभियान को सुचारू रूप से अमली जामा पहनाने के लिए कई भागों में बांट दिया गया है. उक्त बातें बक्सर सांसद अश्विनी चौबे ने अतिथि गृह में प्रेसवार्ता के दौरान कहीं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सभी भागों की जिम्मेवारी पार्टी कार्यकर्ताओं को अलग-अलग दी गयी है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बाढ़ की इस विभीषिका से स्थायी निदान के लिए राज्य व केंद्र सरकार से बातें हो रही हैं. इसके लिए हाइडेन डैम निर्माण की बात राज्य व केंद्र से निर्माण करने की मांग की है.
उत्तरी बिहार है पूरी तरह तबाह
उत्तरी बिहार के 12 जिले बाढ़ के कारण पूरी तरह तबाह हो चुके हैं तथा छह जिले बाढ़ से प्रभावित हैं. लोगों का जन जीवन तबाह हो गया है. इनकी सहायता के लिए भाजपा के जिला इकाई की एक बड़ी टीम 30 अगस्त को जिला से राहत सामग्रियों के साथ रवाना होगी. यह टीम बाढ़ग्रस्त निर्धारित कैंप में राहत सामग्रियों के साथ जाकर लोगों को सहायता करेगी.
अधवारा जलसमूह से बचाव के करने होंगे उपाय : उत्तरी बिहार में प्रतिवर्ष आनेवाली विभीषिका के स्थायी निदान के लिए सांसद ने हाइडेन डैम बनाने की बात केंद्र सरकार से की है, जिससे अधवारा नदी समूह से होनेवाली तबाही से बचा जा सके. अब राज्य एवं केंद्र में एक सरकार है. इस समस्या के हल के लिए स्थायी समाधान निकालने के प्रयास पर विचार किया जा रहा है. अगले 50 से 100 सालों में इस क्षेत्र के लोगों को बाढ़ की विभीषिका की समस्या से निजात दिलाने की योजना बनायी जा रही है.
जल नीति की जिम्मेवारी केंद्र सरकार की हो : राज्यों के आपसी सहयोग से जल केंद्र का विषय बने. इसके लिए पार्लियामेंट की कई कमेटियों ने भी अपना रिपोर्ट इस संबंध में दिया है. यह राज्यों का मसला नहीं होना चाहिए.
जल नीति केंद्र सरकार की होनी चाहिए. इससे ऐसे मसलों का हल निकालने में आसानी होगी तथा ऐसे विभीषिका पर नियंत्रण लगाया जा सकता है. प्रेसवार्ता के दौरान जिलाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष राजवंश सिंह, प्रदीप दूबे, विश्वनाथ राम, प्रदेश किसान मोर्चा के अजय यादव, माधुरी कुंवर, पुनीत सिंह, आदित्य चौधरी, धनंजय राय, हीरामन पासवान, इंदु देवी समेत अन्य शामिल थे.

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