बक्सर : कृषि विज्ञान केंद्र में संचालित तकनीकी सप्ताह कार्यशाला के तीसरे दिन पशुधन एवं मत्स्य प्रबंधन तकनीक विषय पर किसानों को जानकारी दी गयी. किसानों को सरकार की पशु प्रजनन नीति के बारे में बताया गया. विषय वस्तु विशेषज्ञ अधिकारियों ने किसानों से सार्टेड सीमेन उपलब्ध होने की बात बतायी. उन्होंने कहा कि इसके […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
बक्सर : कृषि विज्ञान केंद्र में संचालित तकनीकी सप्ताह कार्यशाला के तीसरे दिन पशुधन एवं मत्स्य प्रबंधन तकनीक विषय पर किसानों को जानकारी दी गयी. किसानों को सरकार की पशु प्रजनन नीति के बारे में बताया गया. विषय वस्तु विशेषज्ञ अधिकारियों ने किसानों से सार्टेड सीमेन उपलब्ध होने की बात बतायी. उन्होंने कहा कि इसके प्रयोग से 90 प्रतिशत तक बाछी पैदा होने की संभावना रहती है. बरसात के मौसम में पशुओं में पायी जानेवाली बीमारियों की पहचान व निदान, मुरगी एवं बतख पालन से आय में बढ़ोतरी, मत्स्य उत्पादन की तकनीक एवं पशुधन के लिए समुचित पोषण प्रबंधन की जानकारी दी गयी.
कार्यक्रम में धान सह मत्स्य, मछली सह बतख पालन की तकनीकी प्रैक्टिकल के साथ जानकारी दी गयी. कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पशुपालन पदाधिकारी बक्सर सह मुख्य अतिथि डॉ जयप्रकाश नारायण, विशिष्ट अतिथि जिला मत्स्यपालन कार्यालय के प्रतिनिधि अजय चौधरी, पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ टीपी नारायण, जितेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ. बायफ बक्सर के जितेंद्र प्रसाद ने किसानों को जानकारी देते हुए कहा कि सरकार की पशु प्रजनन योजना के अनुसार उत्पादन बढ़ाने के लिए पशु प्रजनन पर कार्य किया जा रहा है. उन्होंने ने बताया कि वर्तमान में विदेशी गाय जर्सी, फ्रिजियन आदि प्रजातियों के चार प्रकार के सीमेन जो 50 प्रतिशत, 62 प्रतिशत, 75 प्रतिशत व 100 प्रतिशत में उनके केंद्र पर उपलब्ध हैं. साथ ही उन्होंने यह जानकारी दी कि उनके पास सार्टेड सीमेन भी उपलब्ध है.
18 अगस्त से शुरू होगा टीकाकरण : कार्यशाला में किसानों को संबोधित करते हुए जिला पशुपालन पदाधिकारी बक्सर व मुख्य अतिथि डॉ जयप्रकाश नारायण ने बताया कि अपने पशुओं का समय-समय पर टीकाकरण कराते रहें. इस समय गलाघोंटू का टीका लगवाएं तथा 18 अगस्त से सरकार द्वारा पंचायत स्तर पर पशुओं के लिए टीका करण कार्यक्रम का आयोजन होगा.
मछली पालन की दी गयी जानकारी : कार्यशाला में किसानों को मत्स्य पालन की जानकारी दी गयी. धान के साथ मछली पालन एवं मछली पालन के साथ बतख पालन की जानकारी दी गयी. विशिष्ट अतिथि जिला मत्स्य पालन पदाधिकारी के प्रतिनिधि अजय चौधरी ने बताया कि तालाब के जल का पीएच मान नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर उसमें चूना का प्रयोग करते रहें तथा मछलियों को उनके शारीरिक भार के अनुसार भोजन देते रहें.
इन किसानों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन विषय वस्तु विशेषज्ञ सस्य विज्ञान डाॅ मान्धाता सिंह द्वारा किया गया. कार्यक्रम में 47 की संख्या में जिले के विभिन्न प्रखंडों से प्रगतिशील कृषक एवं महिला कृषक उपस्थित हुए, जिसमें तारामुनि देवी, ललिता देवी, धर्मावती देवी, दीनानाथ राम, राकेश कुमार सिंह, अमरेश कुमार सिंह, अवधेश कुमार यादव, बर्मेश्वर कुमार सिंह, हरिहर सिंह, आदि मौजूद थे. कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र बक्सर के विकास कुमार, भरत राम, रवि चटर्जी, राजेश कुमार राय, सरफराज अहमद खान, प्रेम कुमार आदि ने सहयोग किया.
एम किसान पोर्टल से जुड़ें किसान
मौके पर जानकारी दी गयी कि किसानों को तकनीकी क्षेत्र में दक्ष करना आत्मा का मुख्य कार्य है, जिसमें किसान वैज्ञानिक वार्तालाप की अहम भूमिका है. बताया गया कि एम किसान पोर्टल के द्वारा एक लाख 96 हजार किसानों को जोड़ कर अनवरत खेती-बाड़ी व मौसम की जानकारी दी जा रही है़ इसके अलावे सोशल मीडिया के फेसबुक पेज से भी खेती-बाड़ी की विस्तृत जानकारी उपलब्ध करायी जा रही है. इच्छुक कृषक टाॅल फ्री नंबर 18001801551 पर संपर्क कर अपना मोबाइल नंबर एम किसान पोर्टल से निबंधित करा सकते हैं.