मनमानी. आठ साल से साहबों के पास पड़ा है ग्रामीणों का आवेदन
अतिक्रमण हटाने को पत्र लिख कर भूल गये एसडीओ
बक्सर : सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर उसे अपने कब्जे में लेने का खेल बदस्तूर जारी है. भू-माफियाओं की सांठगांठ के कारण अधिकारियों के पास की गयी शिकायतें भी फाइलों में दब जाती हैं. एक ऐसा ही मामला ब्रह्मपुर प्रखंड के भदवर गांव में देखने को मिलता है. यह पंचायत जिले के अंतिम छोर पर सुदूर इलाके में है. इससे यहां बड़े अधिकारी जल्द नहीं पहुंच पाते. प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों की नरम रवैये का आलम यह है कि सरकारी जमीनों, तालाब, पोखर, सर्वसाधारण की जमीनों, गैरमजरूआ भूमि आदि का अतिक्रमण धड़ल्ले से किया जा रहा है. अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई के लिए दिये गये आवेदन अंचल कार्यालय के टेबल पर धूल फांक रहे हैं.
कार्रवाई के नाम पर महज खतियान के आधार पर सीमांकन करा दिया जाता है. बहुत दबाव पड़ने पर अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध नोटिस जारी कर अतिक्रमण वाद की कार्रवाई प्रारंभ कर दी जाती है. यह सिलसिला वर्षों तक चलता रहता है. कालांतर में वही अतिक्रमण स्थायित्व का आकार ले लेता है. इसके बाद वहां पौधारोपण, मंदिर का निर्माण या मकान बना कर अवैध अतिक्रमण पर वैधता की मुहर लगा दी जाती है.
अगस्त 2009 में ग्रामीणों ने दिया था आवेदन : सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने में अधिकारियों की लापरवाही हर स्तर पर सामने आती रही है. यह मामला भी इससे अछूता नहीं है. गांव में कई बीघे में फैले तालाब का जब अतिक्रमण शुरू हुआ, तब यहां के ग्रामीणों ने सीओ को एक आवेदन लिखा, जिसमें अतिक्रमण से होनेवाली परेशानियों का बिंदुवार जिक्र करते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की. ग्रामीणों ने लिखा कि जल संग्रहण के इस प्राकृतिक स्रोत को भर देने पर इस क्षेत्र में कालांतर में सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि के बंजर होने का खतरा है. भूगर्भीय जल स्तर कम होने से सूखे की मार झेलनी पड़ेगी. वहीं, जल संचयन नहीं होने से बाढ़ के संभावित खतरे का भी जिक्र किया गया था. लेकिन, हमेशा की तरह जगजाहिर साहब लोगों की अकर्मण्यता के कारण आवेदन को रद्दी समझ कर फेंक दिया गया.
मुखिया से लेकर मुख्यमंत्री तक को दिया आवेदन : ग्रामीण राधेश्याम तिवारी ने कई लोगों के हस्ताक्षरयुक्त आवेदन तत्कालीन मुखिया से लेकर मुख्यमंत्री तक भेज कर कार्रवाई की मांग की थी. इसमें डुमरांव एसडीओ, डीसीएलआर, बक्सर डीएम को भी आवेदन की प्रति भेजी गयी थी. लेकिन, आश्वासनों की कोरी घुट्टी के अलावा ग्रामीणों को कुछ हासिल नहीं हुआ और जिस समस्या की चिंता जाहिर की गयी थी, वही हुआ. ग्रामीण अविनाश कुमार ने बताया कि तत्कालीन एसडीओ रजनीकांत ने ब्रह्मपुर सीओ को अतिक्रमण हटाने और जलस्रोतों को पूर्ववत करने का आदेश निर्गत किया था. इसके बाद सीओ ने भी नोटिस भेजा था. इस बीच अतिक्रमण ने अब वीभत्स रूप ले लिया है. अस्थायी अतिक्रमण स्थायी निर्माण में बदल गया. लेकिन, कार्रवाई कुछ नहीं हुई.
