कुव्यवस्था. पेयजल के लिए चापाकल पर छात्र-छात्राओं की लगती है लंबी लाइन
एक चापाकल से प्यास बुझा रहे 650 छात्र-छात्राएं
हाल महावीर चबूतरा मध्य विद्यालय का
डुमरांव : डुमरांव शहर के बीचोबीच एक ऐसा विद्यालय है, जहां बच्चों को बैठने के लिए बेंच तक नहीं है. जाड़ा, गर्मी या बरसात का मौसम हो, जमीन पर बैठ कर बच्चे पढ़ाई करते हैं. विद्यालय में 650 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. शहर के बीचोबीच विद्यालय का यह हाल है, तो ग्रामीण इलाके में कैसी व्यवस्था होगी, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. मध्य विद्यालय महाबीर चबूतरा में पढ़ने वाले बच्चों को पानी पीने के लिए भी लंबी लाइन लगानी पड़ती है. एक चापाकल के भरोसे बच्चों की प्यास बुझती है. इस विद्यालय में 18 शिक्षक
पदस्थापित हैं. इनमें एक शिक्षक प्रखंड संकुल संसाधन केंद्र पर बीआरपी में प्रतिनियुक्त हैं. बैठने व पेयजल की समस्या को छोड़ दें, तो विद्यालय में कुल मिला कर बेहतर स्थिति है. बरसात के दिनों में विद्यालय में आनेवाले छात्रों की उपस्थित कम हो जाती है. शहर में होने कारण यहां शिक्षा विभाग के अधिकारियों का हमेशा आना-जाना रहता है. इसके बावजूद भी आज तक विद्यालय में बेंच-डेस्क की व्यवस्था नहीं की गयी. पहले यह विद्यालय लाला टोली मुहल्ले चलती थी. इसके बाद इस विद्यालय को मॉडल थाने के सामने लाया गया.
650 बच्चों के लिए है एक चापाकल : विद्यालय में एक चापाकल है. लंच के वक्त पानी पीने के लिए छात्र-छात्राओं की लंबी लाइन लगती है. सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को गरमी के दिनों में होती है. बच्चे मध्याह्न भोजन करने के बाद पानी के लिए परेशान नजर आते हैं. ऐसे में एक शिक्षक को बच्चों को देखना पड़ता है, ताकि कोई बच्चा पानी पीने के लिए आपस में झगड़ा न करे. वहीं, लंबी लाइन होने की वजह से बच्चे बाहर निकल सड़क किनारे लगे चापाकलों से प्यास बूझाते हैं.
शौचालय में लटका रहता है ताला : विद्यालय में कुल छह शौचालय है. तीन में ताला लटका रहता है. शौचालय में साफ-सफाई का अभाव है. तीन शौचालय का उपयोग शिक्षक-शिक्षिकाएं करती हैं. नियमित रूप से शौचालय की साफ-सफाई को लेकर विद्यालय प्रबंधन उदासीन बना रहता है.
एचएम के कार्यालय में चलता है लाइब्रेरी : बच्चों के बेहतर पठन-पाठन को लेकर विद्यालय में लाइब्रेरी प्रधानाध्यापक कार्यालय में चलता है. शिक्षक परमानंद चौबे ने बताया कि बच्चे पुस्तकालय को लेकर काफी जागरूक रहते हैं. प्रतिमाह 30 से 40 बच्चे लाइब्रेरी से पुस्तक ले जा कर घर पर पढ़ते हैं. बता दें कि विद्यालय में इस वर्ष अभी तक एक से आठ तक पढ़ने वाले बच्चों को किताब उपलब्ध नहीं हो पाया है.
