बक्सर : सदर अस्पताल में संचालित शिशु गहन चिकित्सा इकाई अपने उद्घाटन के छह साल बाद भी रुग्ण स्थिति में संचालित हो रही है. सृजित पद के अनुपात में न तो चिकित्सक हैं और न ही कर्मी, जिसके कारण नवजात शिशु बेडों की अपेक्षा सदर अस्पताल में पहुंचने के बजाय निजी व कम सुविधावाले अस्पतालों में पहुंच जाते हैं, जिससे निजी अस्पतालों में मरीजों का आर्थिक दोहन होता है. सदर अस्पताल में संचालित नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई इन दिनों भी कर्मियों की कमी का दंश झेल रही है. हालांकि सदर अस्पताल की शिशु गहन चिकित्सा इकाई को व्यवस्थित करने की कवायद जिला स्वास्थ्य विभाग ने शुरू कर दी है.
व्यवस्थित करते हुए नौ प्रशिक्षित नर्स कर्मी एवं एक चिकित्सक की तैनाती की गयी है, जिसके कारण इन दिनों इस इकाई में प्रतिमाह शिशुओं की स्वास्थ्य लाभ लेने की संख्या बढ़ने लगी है. महज एक चिकित्सक की तैनाती होने के कारण 24 घंटे संचालित होनेवाली इकाई प्रशिक्षित नर्स व कर्मियों के भरोसे ही संचालित हो रही है. इकाई में बच्चे के आने के साथ आवश्यक इलाज इन नर्सों के द्वारा ही शुरू की जाती है. डॉक्टर की कमी के कारण नवजात शिशुओं का इलाज ज्यादातर समय डॉक्टर की बजाय नर्स ही करती हैं.
नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में 12 अत्याधुनिक सुसज्जित बेड हैं. इकाई पर 24 घंटे सेवा की सुविधा उपलब्ध है. प्रतिमाह इस व्यवस्था के बीच भी 75 से 100 की संख्या में बच्चे स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं. इकाई पूरी तरह वातानुकूलित भवन में संचालित है, लेकिन शुरू से ही रुग्ण स्थिति में चलने के कारण परिजन अपने बच्चे को हाइ तकनीक से युक्त इस इकाई में इलाज कराने नहीं पहुंच पाते हैं.
केंद्र में एक शिशु चिकित्सक हैं तैनात : सदर अस्पताल में बेहतर सेवा बहाल करने के लिए नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई की स्थापना 2012 में की गयी. वर्तमान में सिविल सर्जन ने इकाई को जीवित करने के लिए एक शिशु डॉक्टर को तैनात किया है. इसके साथ ही इकाई की सभी खराब मशीनों को ठीक कराया गया. शिशु इकाई में कार्यरत नर्स को शिशु से संबंधित रोगों एवं उसकी देखभाल की जानकारी दी गयी है.
पूरी तरह वातानुकूलित है एसएनसीयू : सदर अस्पताल कैंपस में 2012 में एसएनसीयू स्थापित है.
सरकार ने इसकी स्थापना नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को कम करने के लिए किया था. इकाई पूरी तरह सुसज्जित 12 बेडवाला अत्याधुनिक व वातानुकूलित बनाया गया है, लेकिन चिकित्सक की कमी के कारण इकाई का लाभ बच्चों को नहीं मिल पा रहा है. एक चिकित्सक की तैनाती के बाद एसएनसीयू से लोगों में आशा की किरण दिखने लगी है.
नवजात शिशु इकाई में स्वीकृत पद : नवजात शिशु इकाई के पूरी तरह संचालन के लिए चार डॉक्टर एवं 13 ए ग्रेड प्रशिक्षित नर्सों की आवश्यकता है. जबकि संचालन के लिए वर्षों बाद एक चिकित्सक की तैनाती हुई है. वहीं, 13 नर्स स्टाफ की तुलना में कुल नौ स्टाफ नर्स की तैनाती की गयी है.
