अस्पताल में ब्लड बैंक मशीन करीब छह साल से बनी है शोभा की वस्तु
एक साल पहले टीम हो चुकी है प्रशिक्षित, ब्लड बैंक खुलने का कर रही इंतजार
डुमरांव : अनुमंडलीय अस्पताल में ब्लड बैंक 2010 में पहुंची. लेकिन छह वर्ष गुजरने के बावजूद अनुमंडल के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल सका. इससे पहले यह मशीन प्राथमिक स्वास्थ्य केेंद्र डुमरांव में वर्ष 2008 में आया. अनुमंडलीय अस्पताल में ब्लड बैंक सेवा शुरू नहीं होने से अकसर मरीज ब्लड के अभाव में रेफर दिये जाते हैं. कई मरीजों की जान रास्ते में जा चुकी है. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार अनुमंडल अस्पताल में ब्लड स्टोरेज यूनिट खोलने का रास्ता साफ हो चुका है.
बक्सर ब्लड बैंक यूनिट ने हरी झंडी देते हुए एनओसी दे दिया है. इसके अलावे दोनों के बीच ब्लड का लेने-देने भी होगा. ब्लड स्टोरेज खुलने की सारी प्रक्रिया पूरी कर ली. अब केवल डीआइ के निरीक्षण रिपोर्ट भेजने का इंतजार हो रहा है. ब्लड स्टोरेज यूनिट के लिए डाॅक्टर और तकनीशियन की एक टीम होती है. यह टीम प्रशिक्षित होती है. डुमरांव खुलने वाले युनिट के डाॅ गिरीश कुमार सिंह और तकनीशियन बीरबल कुमार एक साल इसका पहले प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं.
ब्लड बैंक खुलने से अनुमंडल मुख्यालय के सात प्रखंड ब्रह्मपुर, चक्की, सिमरी, डुमरांव, चौगाई, केसठ एवं नावानगर के मरीज को इसका लाभ मिलता. ब्लड बैंक नहीं रहने से कोई आपरेशन भी नहीं होता है. घायल मरीज अस्पताल में पहुंचते हैं और अधिक रक्त बहने बहने और ब्लड की जरूरत पड़ने पर मरीज को बक्सर या पटना रेफर कर देते हैं.
जिससे कभी कभार मरीज रास्ते में काल के गाल में समां जाते है. अनुमंडलीय अस्पताल उपाधीक्षक डाॅ नागेंद्र भूषण सिंह ने बताया कि ब्लड स्टोरेज यूनिट के लिए कमरा तैयार कर दिया गया है. यूनिट के लिए सभी समान की खरीदारी की जा चुकी है. जिला मुख्यालय सीएस के द्वारा डीआइ रिपोर्ट भेज रिपोर्ट तैयार कर ड्रग कंट्रोलर पटना को भेज दिया गया है.
