एएसआइ की आपत्ति और पर्यावरण के कारण अटका राजगीर का एलिवेटेड रोड

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्टों में शामिल राजगीर एलिवेटेड रोड निर्माण पर फिलहाल ग्रहण लगता नजर आ रहा है.

राजगीर. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्टों में शामिल राजगीर एलिवेटेड रोड निर्माण पर फिलहाल ग्रहण लगता नजर आ रहा है. वर्षों पूर्व स्वीकृत जिस परियोजना से राजगीर की यातायात व्यवस्था और पर्यटन विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जगी थी, वह अब आपत्तियों और आशंकाओं के कारण ठंडे बस्ते में पड़ी दिखायी दे रही है. सूत्रों की माने एलिवेटेड रोड निर्माण में सबसे पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की आपत्ति सामने आयी. एएसआइ का तर्क था कि इस निर्माण कार्य से राजगीर क्षेत्र की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों को नुकसान पहुंच सकता है. इसके बाद यह आशंका भी जतायी गयी कि एलिवेटेड रोड के पायलिंग कार्य के दौरान होने वाले गहरे गड्ढों से राजगीर के विश्व प्रसिद्ध गर्मजल के कुंडों और प्राकृतिक झरनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. इन्हीं कारणों से यह महत्वाकांक्षी परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही है. प्रशासनिक स्तर पर मंजूरी के बावजूद जमीन पर काम शुरू न होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी और निराशा दोनों देखी जा रही है. जानकार बताते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं इस परियोजना को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से पूर्व में स्थल निरीक्षण कर चुके हैं. मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बाद स्थानीय नागरिकों और व्यवसायियों में यह भरोसा जगा था कि राजगीर की दशकों पुरानी यातायात समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा और पर्यटन को नयी गति मिलेगी. लोगों को उम्मीद थी कि एलिवेटेड रोड बनने से शहर के भीतर भारी वाहनों और पर्यटक गाड़ियों का दबाव कम होगा. लेकिन परियोजना को स्वीकृति मिले कई वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से आम लोगों की उम्मीदें धीरे-धीरे टूटती नजर आ रही है. पर्यटन नगरी राजगीर का प्रमुख चौराहा पटेल चौक इन दिनों जाम की समस्या का केंद्र बन चुका है. प्रतिदिन यहां घंटों जाम लगना आम बात हो गयी है. इस जाम में स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ स्कूल बसें, पर्यटक वाहन, निजी गाड़ियां और सार्वजनिक परिवहन के साधन फंसे रहते हैं. खासकर पर्यटन सीजन के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एलिवेटेड रोड का निर्माण हो जाता, तो शहर के भीतर का ट्रैफिक काफी हद तक नियंत्रित हो जाता और यातायात व्यवस्था सुचारु हो जाती. एलिवेटेड रोड के निर्माण से न केवल जाम की समस्या से राहत मिलती, बल्कि राजगीर का पर्यटन स्वरूप भी और अधिक आकर्षक बन सकता था. इस सड़क से गुजरते हुए पर्यटक राजगीर की हरी-भरी पहाड़ियों, घने जंगलों और प्राकृतिक सौंदर्य का विहंगम दृश्य देख सकते थे. इससे राजगीर की पहचान एक आधुनिक और पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन नगर के रूप में मजबूत होती. स्थानीय होटल व्यवसायियों और दुकानदारों का मानना है कि इससे होटल, रेस्टोरेंट और अन्य पर्यटन आधारित व्यवसायों को भी सीधा लाभ मिलता. केंद्र की मंजूरी के बाद भी अधर में राजगीर का एलिवेटेड रोड : उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वर्षों पूर्व राजगीर में 8.7 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की थी. इस परियोजना पर लगभग 1300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. योजना के तहत रोप-वे के पास चढ़ने और उतरने के लिए रैंप का निर्माण भी प्रस्तावित था. एलिवेटेड रोड का अधिकांश हिस्सा राजगीर के वन क्षेत्र से होकर गुजरता, जिससे पर्यटकों को प्राकृतिक दृश्यों का आनंद मिलता. योजना के अनुसार, राजगीर के दक्षिण में नालंदा-नवादा सीमा पर स्थित वनगंगा पुल से लेकर उत्तर दिशा में राजगीर-बिहारशरीफ मार्ग पर पंडितपुर के पास तक एलिवेटेड रोड का निर्माण होना था. इस परियोजना का दो बार स्थल निरीक्षण भी किया जा चुका है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर पथ निर्माण विभाग ने प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था, जिसे मंजूरी मिल चुकी है. 30 महीनों में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था. कुल 8.7 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में से 7.40 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होना प्रस्तावित है. अब देखना है कि विभिन्न बाधाओं को दूर कर यह ड्रीम प्रोजेक्ट कब साकार हो पाता है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By AMLESH PRASAD

AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >