Malmas Mela Sairat Land : मैं राजगीर की वही सैरात भूमि हूं, जिस पर सदियों से मलमास मेला लगता आ रहा है. मैं सिर्फ जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि प्राचीन राजगृह की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपरा का हिस्सा हूं. सरकारी नक्शे और अभिलेखों में मेरा रकबा 73 एकड़ से अधिक बताया जाता है. मेरा विस्तार शहर के टेलीफोन एक्सचेंज से लेकर कुंड क्षेत्र तक बताया जाता है. लेकिन जमीन पर मेरी तस्वीर कागज से अलग नजर आती है.
कागज पर 73 एकड़ से अधिक, जमीन पर बदलती तस्वीर
समय के साथ मेरी जमीन के कई हिस्सों पर अलग-अलग तरह के निर्माण होने की बात सामने आती रही है. होटल, रेस्टोरेंट, धर्मशाला, गेस्टहाउस और आवासीय निर्माणों के बीच यह सवाल उठता रहा है कि इन भूखंडों पर निर्माण किस अधिकार और किस अनुमति के आधार पर हुआ. सैरात भूमि की स्थिति को लेकर समय-समय पर प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई की मांग भी उठती रही है.
कब्जे और निर्माण के आरोपों की हो निष्पक्ष जांच
मेरी जमीन को लेकर सबसे बड़ा सवाल सीमांकन और वास्तविक स्थिति का है. कौन सा भूखंड सरकारी अभिलेखों में सैरात भूमि के रूप में दर्ज है और मौके पर उसकी स्थिति क्या है, इसका स्पष्ट मिलान जरूरी है. यदि कहीं अतिक्रमण या नियमों के विरुद्ध निर्माण हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए.
गलत जमाबंदी का मामला भी सामने आ चुका है
मेरी जमीन के एक हिस्से की जमाबंदी को लेकर भी गंभीर मामला सामने आया था. जांच के बाद नालंदा प्रशासन ने संबंधित जमाबंदी को रद्द कर दिया था. इस मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी और कथित रूप से जमाबंदी कराने वाले व्यक्ति के खिलाफ राजगीर थाना में प्राथमिकी दर्ज होने की बात सामने आयी थी. इसके बाद मामले में कार्रवाई की स्थिति को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं.
दशकों पुराने विवादों का भी है इतिहास
मेरी जमीन के एक हिस्से को लेकर पुराने न्यायालयी विवाद और कथित निषेधाज्ञा का हवाला देकर कब्जा बनाये रखने की बातें भी सामने आती रही हैं. ऐसे मामलों में राजस्व अभिलेख, न्यायालय के आदेश और मौके की वास्तविक स्थिति का स्पष्ट मिलान जरूरी है. इससे यह तय हो सकेगा कि किस हिस्से पर किसका वैध अधिकार है और कहां अतिक्रमण की स्थिति है.
राजस्व रिकॉर्ड से लेकर जमीन तक हो सत्यापन
मेरी सुरक्षा के लिए सिर्फ फाइलों में दर्ज रकबे का होना पर्याप्त नहीं है. जरूरी है कि राजस्व रिकॉर्ड, नक्शा और जमीन की वास्तविक स्थिति का संयुक्त सत्यापन कराया जाए. सीमांकन के बाद पूरे क्षेत्र का सार्वजनिक रिकॉर्ड तैयार हो और विवादित भूखंडों की स्थिति स्पष्ट की जाये, ताकि भविष्य में कब्जे या निर्माण को लेकर विवाद की गुंजाइश कम हो.
मलमास मेला की धार्मिक परंपरा से जुड़ी है जमीन
राजगीर का मलमास मेला धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है. मान्यता है कि अधिकमास के दौरान 33 कोटि देवी-देवताओं का राजगीर में प्रवास होता है. इसी दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु राजगीर पहुंचते हैं और पवित्र कुंडों में स्नान करते हैं. ऐसे में मेला क्षेत्र से जुड़ी भूमि का संरक्षण सिर्फ राजस्व का विषय नहीं, बल्कि इससे जुड़ी सांस्कृतिक परंपरा का भी सवाल है.
यदि जमीन का स्वरूप बदला तो मेले के भविष्य पर सवाल
मलमास मेला सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा से जुड़ा है. ऐसे में मेला क्षेत्र की जमीन का अतिक्रमण, बिखराव या अनियोजित निर्माण भविष्य में आयोजन के लिए चुनौती बन सकता है. सवाल यह है कि तीन वर्ष में एक बार लगने वाले इस ऐतिहासिक मेले के लिए आने वाली पीढ़ियों तक पर्याप्त और सुरक्षित भूमि कैसे बचायी जाये.
प्रशासन से सीमांकन और अतिक्रमण की जांच की मांग
सैरात भूमि के संरक्षण के लिए पूरे क्षेत्र का निष्पक्ष सीमांकन कराने की जरूरत है. इसके साथ ही अतिक्रमण और कथित अवैध निर्माण की जांच, राजस्व अभिलेखों का सत्यापन और लंबित विवादों की प्रभावी पैरवी जरूरी है. जहां नियमों का उल्लंघन साबित हो, वहां कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए.
समाज की भी है जिम्मेदारी
मलमास मेला सिर्फ प्रशासन या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है. यह राजगीर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा आयोजन है. इसलिए स्थानीय समाज, सामाजिक संगठन, आध्यात्मिक संस्थाएं और जनप्रतिनिधि भी सैरात भूमि के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं.
मैं सिर्फ जमीन नहीं, राजगृह की विरासत हूं
मैं सिर्फ मिट्टी का एक टुकड़ा नहीं हूं. मैं मलमास मेले की जमीन हूं, राजगृह की परंपरा हूं और मगध की ऐतिहासिक स्मृति का हिस्सा हूं. मेरे संरक्षण का सवाल सिर्फ आज की जमीन बचाने का सवाल नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत सुरक्षित रखने का सवाल भी है.
अब मेरी पुकार पर जवाब जरूरी है
यदि मेरी जमीन सुरक्षित रहेगी, तभी मलमास मेले के लिए उसका स्वरूप और उपयोग सुरक्षित रखा जा सकेगा. इसलिए जरूरत है कि प्रशासन रिकॉर्ड से लेकर जमीन तक पूरी स्थिति स्पष्ट करे, विवादित हिस्सों की जांच कराये और जहां अतिक्रमण या अनियमितता साबित हो, वहां नियमानुसार कार्रवाई करे. मेरी पुकार किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी पहचान और विरासत को बचाने की पुकार है.
Also Read :
