साधना भारतीय शास्त्रीय नृत्य की आत्मा : डॉ सोनल

डॉ. सोनल मानसिंह की पुस्तक जिगजैग माइंड पर आधारित विशेष संवाद सत्र में प्रख्यात इतिहासकार डॉ. विक्रम सम्पत ने इस कृति को आत्मकथा से कहीं आगे बताते हुए भारतीय संस्कृति, कला और जीवन-दर्शन का सजीव दस्तावेज कहा.

राजगीर. डॉ. सोनल मानसिंह की पुस्तक जिगजैग माइंड पर आधारित विशेष संवाद सत्र में प्रख्यात इतिहासकार डॉ. विक्रम सम्पत ने इस कृति को आत्मकथा से कहीं आगे बताते हुए भारतीय संस्कृति, कला और जीवन-दर्शन का सजीव दस्तावेज कहा. उन्होंने कहा कि पुस्तक में व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से भारतीय बौद्धिक और सांस्कृतिक परंपरा की गहरी झलक मिलती है. डॉ. सोनल मानसिंह ने पुस्तक के शीर्षक “ज़िगज़ैग माइंड” की व्याख्या करते हुए बताया कि यह रचनात्मक जिज्ञासा, विविध अनुभवों से सीखने और निरंतर खोज की प्रक्रिया का प्रतीक है. उन्होंने गुरु–शिष्य परंपरा, कठोर अनुशासन और दीर्घ साधना को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की आत्मा बताया. उनके अनुसार शास्त्रीय नृत्य केवल मंचीय प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक जीवंत दर्शन है, जिसमें शरीर स्वयं विचार और भावना की अभिव्यक्ति करता है. सत्र में नदियों, देवी-देवताओं और महाकाव्य पात्र द्रौपदी के उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय मिथक आज के सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय संदर्भों में भी उतने ही प्रासंगिक हैं. यह संवाद कला, संस्कृति और समकालीन चेतना के गहरे संबंधों को प्रभावी रूप से उजागर करता है.

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By SANTOSH KUMAR SINGH

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