राजगीर के स्कूल में 20 साल पहले खर्च हुई सरकारी राशि, अब तक नहीं दिया हिसाब? मांगा गया उपयोगिता प्रमाण पत्र

राजगीर के आरडीएच प्लस टू स्कूल में दो दशक पहले खर्च हुई सरकारी राशि का हिसाब अभी तक जमा नहीं हुआ है. शिक्षा विभाग ने इस मामले में स्कूल प्रबंधन के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है और तत्काल प्रमाण पत्र जमा कराने का निर्देश दिया है.

आवंटित राशि खर्च होने के करीब दो दशक बाद भी उपयोगिता प्रमाण पत्र जिला शिक्षा कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराने को लेकर राजगीर का आरडीएच प्लस टू स्कूल इन दिनों सुर्खियों में है.

वर्ष 2005-06 और 2006-07 में विद्यालय के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए पुस्तकालय, प्रयोगशाला और उपस्कर क्रय के मद में सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र अब तक विभाग को नहीं सौंपा गया है.

आधा दर्जन से अधिक पत्रों और स्मार पत्रों के बाद भी नहीं दिया गया दस्तावेज

सूत्रों के अनुसार उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के लिए जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से विद्यालय को पूर्व में भी कई बार पत्र और स्मार पत्र भेजे जा चुके हैं.

इसके बावजूद विद्यालय प्रशासन की ओर से न तो अपेक्षित दस्तावेज उपलब्ध कराया गया और न ही मामले में कोई ठोस जवाब विभाग को दिया गया. करीब 20 वर्षों से लंबित यह मामला अब शिक्षा विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है.

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सचिव ने जताई कड़ी नाराजगी

मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सचिव ने बैठक के दौरान लंबित उपयोगिता प्रमाण पत्र के मामले पर कड़ी नाराजगी जताई.

उन्होंने संबंधित विद्यालय को तत्काल उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा कराने का स्पष्ट निर्देश दिया. इसके बाद जिला शिक्षा कार्यालय ने 28 अगस्त को डीपीओ स्थापना को पत्र भेजकर आरडीएच प्लस टू स्कूल से उपयोगिता प्रमाण पत्र अविलंब प्राप्त करने का निर्देश दिया है.

बार-बार निर्देश के बाद भी कार्रवाई न होने से प्राचार्य और विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

विभाग की ओर से जारी इस निर्देश को अंतिम चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है. पूर्व में भी आधे दर्जन से अधिक बार पत्राचार और स्मार पत्र के बावजूद मामला लंबित रहने पर सवाल उठ रहा है कि बार-बार निर्देश के बाद भी प्रमाण पत्र जमा नहीं कराने पर विद्यालय के प्राचार्य के विरुद्ध अब तक प्रशासनिक अथवा विधिसम्मत कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

दो दशक से लंबित दस्तावेज को लेकर ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि दो दशक तक सरकारी राशि से जुड़े दस्तावेज का लंबित रहना सामान्य प्रशासनिक लापरवाही नहीं माना जा सकता है.

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इस मामले में राशि के उपयोग और अभिलेखों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है. साथ ही जिला शिक्षा कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतने लंबे समय तक लंबित मामले में प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

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By रामविलास प्रसाद

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