Malmas Mela 2026 (रामविलास): महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की प्रसिद्ध पंक्ति ‘आज मन पावन हुआ, जेठ में सावन हुआ’ शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर में पूरी तरह चरितार्थ होती दिखी. ऐतिहासिक राजगीर मलमास मेला के दौरान महज 13 दिनों के भीतर दूसरी बार आई तेज आंधी, गरज-चमक और मूसलाधार बारिश ने पूरे मेला क्षेत्र की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है. अचानक बदले मौसम के मिजाज और चक्रवाती हवाओं के साथ हुई इस भारी बारिश का सीधा असर देश-दुनिया से आए श्रद्धालुओं, दुकानदारों, किसानों और फुटपाथ व्यवसायियों पर पड़ा है, जिससे पूरी व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई है.
आसमान में अचानक छाया अंधेरा, मेला क्षेत्र में मची अफरा-तफरी
शुक्रवार की सुबह करीब आठ बजे के बाद अचानक मौसम ने करवट ली और आसमान में घने काले बादल छा गए. देखते ही देखते तेज गर्जना और कड़कती बिजली के साथ मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया. कुछ ही पल में तेज हवाओं ने राजगीर शहर और संपूर्ण मेला परिसर को अपनी चपेट में ले लिया. बारिश का वेग इतना तीव्र था कि पूरे मलमास मेला क्षेत्र में अचानक अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया. ब्रह्मकुंड सहित विभिन्न घाटों और रास्तों पर मौजूद श्रद्धालु व पर्यटक खुद को भीगने से बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों, टेंटों और दुकानों की ओर भागते नजर आए.
जर्मन हैंगर पंडालों में घुसा पानी, तोरण द्वार और अस्थायी होटल जमींदोज
तेज आंधी और भारी बारिश के कारण मेले के लिए बनाए गए करोड़ों के अस्थायी आधुनिक ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है:
- तोरण द्वार ध्वस्त: मेले के मुख्य रास्तों पर भव्यता के लिए बनाए गए तोरण द्वार आंधी का वेग नहीं सह पाए और भरभराकर जमींदोज हो गए.
- होटल और शिविर क्षतिग्रस्त: तेज हवाओं के झोंकों से तंबूनुमा कई अस्थायी होटल उखड़ गए. वहीं, राजगीर स्टेट गेस्ट हाउस परिसर में बनाया गया मुख्य स्वास्थ्य शिविर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है.
- सरकारी टेंटों में पानी: वीआईपी और श्रद्धालुओं के लिए बने विशाल जर्मन हैंगर पंडालों, वीआईपी आश्रय स्थलों, पुलिस सहायता केंद्रों, सर्कस और थियेटर के अंदर जलजमाव होने से पानी भर गया है.
- प्रचार सामग्री नष्ट: पर्यटन विभाग द्वारा मेले के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए लगाई गई कई महंगी प्रचार सामग्रियां और होर्डिंग्स तेज हवा में टूटकर बिखर गईं.
झील में तब्दील हुई पार्किंग, फुटपाथ दुकानदारों को भारी आर्थिक चपत
बारिश के बाद राजगीर की सड़कों और वीआईपी इलाकों की स्थिति भी बदतर हो गई है. स्टेट गेस्ट हाउस परिसर में संचालित ‘दीदी की रसोई’ के ठीक सामने घुटने भर पानी जमा हो गया है. वहीं, वाहनों को खड़ा करने के लिए बनाया गया आरडीएच प्लस स्कूल मैदान का विशाल पार्किंग एरिया इस समय पूरी तरह एक झील के रूप में तब्दील हो चुका है, जिससे गाड़ियां कीचड़ और पानी में फंस रही हैं.
इस तबाही की सबसे बड़ी मार फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले छोटे गरीब व्यवसायियों पर पड़ी है. अचानक आए पानी के कारण कपड़े, खिलौने, पूजा-प्रसाद और खाद्य सामग्री बेचने वाले दुकानदारों का लाखों का माल पानी में भीगकर बर्बाद हो गया है.
ड्यूटी छोड़ छिपने को मजबूर हुए पुलिसकर्मी, व्यवस्था सामान्य करने में जुटा प्रशासन
चक्रवाती आंधी के दौरान मेला क्षेत्र की सुरक्षा और विधि व्यवस्था में तैनात दंडाधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों और पुलिस बल को भी भारी फजीहत झेलनी पड़ी. मूसलाधार बारिश से बचने के लिए कई जवान मुस्तैदी छोड़ दुकानों और टेंटों के नीचे शरण लेते दिखाई दिए. कुछ घंटों के लिए ऐसा मंजर बन गया मानो पूरा राजगीर ठहर सा गया हो.
हालांकि, इस बेमौसम बारिश से पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण और चिलचिलाती गर्मी से लोगों को बड़ी राहत जरूर मिली है और तापमान में भारी गिरावट आई है. प्राकृतिक आपदा के बाद जिला प्रशासन और मेला कमिटी की टीमें युद्धस्तर पर पानी निकालने और मेला क्षेत्र की व्यवस्था को दोबारा सुचारू व सामान्य करने के प्रयास में जुट गई हैं.
