Rajgir Cricket Stadium Construction : राजगीर में निर्माणाधीन इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम परियोजना मंगलवार को उस समय अचानक ठप पड़ गई, जब चार माह से मजदूरी नहीं मिलने से नाराज श्रमिकों ने सामूहिक हड़ताल करते हुए स्टेडियम के मुख्य प्रवेश द्वार को जाम कर दिया. काम बंद होने से इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का निर्माण प्रभावित हुआ.
बाद में प्रशासन की पहल और निर्माण एजेंसी के आश्वासन के बाद श्रमिकों ने आंदोलन समाप्त कर पुनः काम शुरू किया. हड़ताल कर रहे मजदूरों का आरोप है कि निर्माण कार्य कर रही शापूरजी पलोंजी कंपनी ने अप्रैल माह के बाद से उनका भुगतान नहीं किया है.
लगातार मजदूरी नहीं मिलने से उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. मजदूरों का कहना था कि कई परिवारों के सामने भोजन, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है.
प्रशासन की पहल और आश्वासन के बाद समाप्त हुआ आंदोलन
सूचना मिलते ही अनुमंडल पदाधिकारी सूर्य प्रकाश गुप्ता मौके पर पहुंचे. उन्होंने निर्माण एजेंसी के अधिकारियों और श्रमिकों के साथ अलग-अलग वार्ता कर पूरे मामले की जानकारी ली.
प्रशासन की मौजूदगी में एजेंसी की ओर से बकाया भुगतान का आश्वासन दिया गया. सूत्रों के अनुसार, मजदूरों को बताया गया कि बकाया राशि का एक हिस्सा 5 अगस्त तक तथा शेष भुगतान 15 अगस्त तक कर दिया जाएगा. इस आश्वासन के बाद श्रमिकों ने हड़ताल समाप्त कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया.
विभिन्न राज्यों से आए हैं श्रमिक, कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप
प्रदर्शन में शामिल श्रमिकों ने बताया कि वे बिहार के गया, रोहतास, पूर्णिया और बेगूसराय के अलावा झारखंड तथा पश्चिम बंगाल से रोजगार की तलाश में राजगीर आए हैं.
हेल्पर, फिटर और कारपेंटर के रूप में कार्यरत इन मजदूरों ने कंपनी पर मनमाने तरीके से मजदूरी काटने का भी आरोप लगाया है. उनका कहना है कि बारिश होने पर कुछ घंटे बाद ही काम बंद करा दिया जाता है, लेकिन पूरे दिन की दिहाड़ी काट ली जाती है.
इतना ही नहीं, 20 दिन काम करने के बावजूद केवल 10 दिन का पीएफ जमा किया जाता है और रविवार की छुट्टी का भुगतान नहीं मिलता है. आठ घंटे की ड्यूटी के बदले मात्र 360 से 370 रुपये मिलने की शिकायत भी उन्होंने की.
समस्याओं पर गंभीर चिंता, चेतावनी न मिलने पर दोबारा आंदोलन की चेतावनी
बेगूसराय निवासी श्रमिक दीपक कुमार सिंह समेत कई मजदूरों ने आरोप लगाया कि उनकी समस्याएं सुनने के लिए कंपनी का कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि आगे नहीं आता है, जिससे असंतोष लगातार बढ़ रहा है.
मजदूरों का कहना है कि वे अपने परिवार के बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर यहां आए हैं, लेकिन कई महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और परिवार चलाना कठिन हो गया है.
श्रमिकों ने स्पष्ट किया कि यदि तय समय सीमा के भीतर बकाया भुगतान और अन्य मांगों पर अमल नहीं हुआ, तो वे दोबारा आंदोलन करने को मजबूर होंगे.
