राजगीर: इको-टूरिज्म का हब बनेंगे नालंदा के ऐतिहासिक कमल सरोवर और पुष्करणी तालाब, पर्यटकों को मिलेगा वाटर स्पोर्ट्स का रोमांच

Rajgir Eco Tourism : राजगीर में अब कमल सरोवर बर्ड वाचिंग का प्रमुख केंद्र बनेगा, वहीं पुष्करणी तालाब का जीर्णोद्धार इको-टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स की गतिविधियों से जुड़ा होगा। यह पहल नालंदा को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर लाएगी।

Rajgir Eco Tourism : प्राचीन नालंदा की ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों को अब विश्वस्तरीय पर्यटन पहचान मिलने जा रही है. जिलाधिकारी उदिता सिंह के निर्देश पर कमल सरोवर और ऐतिहासिक पुष्करणी तालाब को इको-टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. इससे नालंदा आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को प्रकृति, इतिहास और आधुनिक सुविधाओं का एक अद्भुत संगम देखने को मिलेगा.

कमल सरोवर बनेगा बर्ड वाचिंग का प्रमुख केंद्र

जिला प्रशासन प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के समकालीन कमल सरोवर को प्रकृति पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों के लिए संवार रहा है. यह सरोवर पहले से ही प्रवासी और स्थानीय पक्षियों का एक महत्वपूर्ण आश्रय स्थल माना जाता है. यहां प्रतिवर्ष लगभग 235 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं, जिसे देखते हुए इसे बिहार के प्रमुख बर्ड वाचिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है.

पुष्करणी तालाब के जीर्णोद्धार पर खर्च होंगे 4.31 करोड़

भारत-चीन मैत्री के प्रतीक ह्वेनसांग मेमोरियल हॉल के पास स्थित ऐतिहासिक पुष्करणी तालाब के जीर्णोद्धार का काम तेजी से चल रहा है. जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत इसके सौंदर्यीकरण और हरित क्षेत्र विस्तार पर 4.31 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं. प्रशासन यहां आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर वाटर स्पोर्ट्स और अन्य मनोरंजक गतिविधियों की शुरुआत करने जा रहा है.

स्थानीय कला को बढ़ावा देने के लिए बनेगा नालंदा हाट

पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति से जोड़ने और पारंपरिक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए 'नालंदा हाट' की स्थापना की जाएगी. इससे स्थानीय कला और हस्तशिल्प को एक नया राष्ट्रीय मंच प्राप्त होगा. इतिहासकारों के अनुसार, शुंगकाल में निर्मित पुष्करणी तालाब प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय से भी पुराना है, जहां कभी बौद्ध भिक्षु पवित्र स्नान और धार्मिक अनुष्ठान किया करते थे.

पर्यटन सर्किट से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार

पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार कमल सरोवर, पुष्करणी तालाब, ह्वेनसांग मेमोरियल हॉल, बड़गांव और कुंडलपुर को मिलाकर एक एकीकृत पर्यटन सर्किट तैयार किया जा रहा है. यह पहल नालंदा को ऐतिहासिक धरोहर के साथ-साथ नौका विहार और इको-टूरिज्म के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करेगी. इस योजना के धरातल पर उतरने से स्थानीय रोजगार, होटल व्यवसाय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की पूरी उम्मीद है.

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Author: Ramvilas prasad

Published by: Sakshi Kumari

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