बाबा बख्तौर पूजनोत्सव संपन्न, 91 मन हुमाद से हुआ भव्य हवन, हजारों श्रद्धालुओं के बीच बंटा प्रसाद
बिहारशरीफ. हरनौत नगर पंचायत के सबनहुआडीह स्थित बाबा बख्तौर मंदिर परिसर में आयोजित वार्षिक पूजनोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हो गया. वैशाख शुक्ल पक्ष में आयोजित इस परंपरागत आयोजन में इस वर्ष भी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. मंगलवार शाम को भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बाबा बख्तौर, माता गहेल, खिरहर बसावन, नटवा प्राण सिंह और बांगुर बाबा सहित अन्य देवी-देवताओं का बुलावा हुआ. रात्रि में जागरण का आयोजन भी हुआ, जिसमें भक्तगण भक्ति संगीत और कीर्तन में लीन रहे. बुधवार को पूजा में नालंदा, नवादा, शेखपुरा, पटना और लखीसराय सहित कई जिलों से लगभग 25-30 हजार श्रद्धालु पहुंचे. सुबह से देर शाम तक चले अनुष्ठान में 91 मन हुमाद से भव्य हवन किया गया. इसमें 52 टीना घी, छह बोरा गुड़, पांच बोरा जौ, 15-20 किलो लौंग व इलायची, नौ बोरा तिल और सैकड़ों बोरा कपूर की आहुति दी गई. पूजनोत्सव में शामिल सभी भक्तों को प्रसाद के रूप में करीब 90 मन चावल और 200 टीना मीठा से बना रसिया वितरित किया गया. महिलाएं अपने आंचल पसारकर भगतों से आशीर्वाद लेती दिखीं. भक्तों ने मनौती पूरी होने की बात कहकर बाबा के प्रति अपनी आस्था जताई. कोमुद भगत, अवधेश भगत, बोधी भगत और अशोक यादव ने बताया कि यह पूजा यादव समुदाय की पारंपरिक आस्था से जुड़ी है, जो वर्ष 1995 से बड़े पैमाने पर आयोजित हो रही है. इस अवसर पर मुनरिक भगत, सको भगत, अवधेश, गोलू पुजारी सहित लगभग 40 भगतों की उपस्थिति रही. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, बाबा बख्तौर का जन्म माता कोयला के गर्भ से हुआ था, जब पृथ्वी पर राजा दलेल सिंह और राक्षसी शक्तियों का अत्याचार चरम पर था. उन्होंने वनबेरिया क्षेत्र को अत्याचार से मुक्त कर 52 कोस क्षेत्र में शांति स्थापित की थी. अपने मामा बदन सिंह और राजा दलेल की साजिश के तहत वीरगति प्राप्त करने वाले बाबा बख्तौर ने जीवन पर्यंत पीड़ितों की रक्षा और अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया.
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