राजगीर की पहाड़ियों पर पहली बार आयोजित हुआ 'तिरंगा ट्रेक', हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे 38 ट्रेकर्स ने तय किया रोमांचक सफर

राजगीर की मनोरम पहाड़ियों पर पहली बार 'राजगीर तिरंगा ट्रेक' का आयोजन हुआ, जो स्वतंत्रता दिवस और 'हर घर तिरंगा' अभियान का एक अनूठा संगम था. इस साहसिक यात्रा में 38 प्रतिभागियों ने राष्ट्रप्रेम और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया.

Nalanda News: स्वतंत्रता दिवस एवं 'हर घर तिरंगा' अभियान के पावन अवसर पर राष्ट्रप्रेम, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति से जुड़ाव का अनूठा संदेश देने के उद्देश्य से पहली बार बिहार के प्रसिद्ध हिल स्टेशन राजगीर में रविवार को 'राजगीर तिरंगा ट्रेक' का सफल आयोजन किया गया. नालंदा वन प्रमंडल और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस विशेष ट्रैकिंग कार्यक्रम में 38 प्रतिभागियों ने हाथों में तिरंगा लेकर राजगीर की मनोरम पहाड़ियों, प्राकृतिक ढलानों और घने वन क्षेत्रों के बीच साहसिक सफर तय किया.

घोड़ाकटोरा इको पार्क से शुरू होकर गंगाजी जलाशय तक पहुंचा कारवां

इस ऐतिहासिक ट्रैकिंग की शुरुआत सुप्रसिद्ध घोड़ाकटोरा इको पार्क से हुई. प्रतिभागियों ने पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के बाद हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामकर कदम बढ़ाए. ट्रेकर्स इंद्रशाल गुफा जैसे पौराणिक स्थलों से गुजरते हुए राजगृह गंगाजी जलाशय तक पहुंचे. पहाड़ी रास्तों पर 'भारत माता की जय' और 'हर घर तिरंगा' के उद्घोष से पूरी वादियों का वातावरण देशभक्ति के रंग में रंग गया. इस ट्रेक में महिला प्रतिभागियों ने भी काफी उत्साह और साहस के साथ हिस्सा लिया.

प्राकृतिक संपदा से युवाओं को जोड़ना मुख्य उद्देश्य: डीडीसी सारा अशरफ

कार्यक्रम के दौरान नालंदा की उप विकास आयुक्त (डीडीसी) सुश्री सारा अशरफ ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को यह अहसास कराना है कि नालंदा केवल प्राचीन इतिहास और शिक्षा का केंद्र ही नहीं है, बल्कि यहां की प्राकृतिक संपदा और वन संपदा भी अद्वितीय है. उन्होंने कहा कि युवाओं को जल, जंगल और जमीन के संरक्षण से जोड़ने की आवश्यकता है. डीडीसी ने बताया कि प्रतिभागियों की सुरक्षा के लिए पूरे रूट पर मेडिकल टीम, एम्बुलेंस और पर्याप्त प्रशासनिक व्यवस्थाएं तैनात की गई थीं.

पर्यावरण संरक्षण और 'स्वच्छ एवं हरित भारत' का दिया गया संदेश

सहायक वन संरक्षक सिम्मी प्रियनैना ने बताया कि इस तरह की साहसिक गतिविधियां आम लोगों और युवाओं को प्रकृति, पर्यावरण और जैव विविधता से जोड़ने का प्रभावी जरिया हैं. उन्होंने भविष्य में भी ऐसे आयोजन लगातार कराने की बात कही. ट्रेक में शामिल युवाओं ने राजगीर की पहाड़ियों पर ट्रैकिंग के अनुभव को बेहद रोमांचक और अविस्मरणीय बताया.

इस अवसर पर रेंजर श्याम कुमार पांडेय, डीआरडीए निदेशक, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी (डीपीआरओ) सहित वन विभाग और जिला प्रशासन के कई वरीय अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे. अधिकारियों ने संदेश दिया कि राष्ट्रप्रेम केवल झंडा फहराने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के वनों, जलस्रोतों और प्राकृतिक संपदा की रक्षा करना भी प्रत्येक नागरिक का परम कर्तव्य है.

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By रामविलास प्रसाद

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