नियमित टीकाकरण में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला
इस कार्यशाला में बिहार शरीफ के चार शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुंदरगढ़, बड़ी दरगाह, सोहसराय एवं सकुनत कलां के चयनित 11 आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े वार्ड पार्षद, विकास मित्र एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजसेवियों ने भाग लिया.
नियमित टीकाकरण में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला
बिहारशरीफ. सदर अस्पताल, बिहार शरीफ के सभागार में मंगलवार को नियमित टीकाकरण में शुद्धिकरण और सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला सह उन्मुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम गावी शून्य खुराक परियोजना के अंतर्गत जनसंख्या परिषद (पीसीआइ) द्वारा आयोजित किया गया. इस कार्यशाला में बिहार शरीफ के चार शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुंदरगढ़, बड़ी दरगाह, सोहसराय एवं सकुनत कलां के चयनित 11 आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े वार्ड पार्षद, विकास मित्र एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजसेवियों ने भाग लिया. कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ राजेंद्र चौधरी ने की. उन्होंने कहा कि सामुदायिक स्तर पर जनप्रतिनिधियों और प्रभावशाली लोगों की सक्रिय भागीदारी से ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि प्रत्येक बच्चे और गर्भवती महिला का समय पर टीकाकरण हो. जिला प्रशिक्षण पदाधिकारी ने बताया कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ऐसे परिवारों तक पहुंचना है, जो किसी कारणवश अपने बच्चों का टीकाकरण नहीं कराते। स्थानीय प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को संवाद कौशल और जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. पीसीआइ के जिला समन्वयक प्रिंस कुमार ने प्रतिभागियों को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम, उससे बचाव होने वाली गंभीर बीमारियों तथा आमजन से संवाद स्थापित करने की प्रभावी विधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. इस अवसर पर यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि, प्रखंड स्वास्थ्य प्रशिक्षक कौशलेंद्र कुमार, प्रबंधक प्रमोद कुमार, पीसीआइ की प्रखंड समन्वयक सुलेखा कुमारी, बीएमसी नवीन, पर्यवेक्षक राजीव कुमार सहित कई अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई घातक बीमारियों से बचाव करने का सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपाय है. इससे बच्चों को पोलियो, खसरा, गलघोंटू, काली खांसी, टिटनेस जैसी जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा मिलती है. गर्भवती महिलाओं को टिटनेस जैसे संक्रमण से बचाव होता है और नवजात शिशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होती है. नियमित टीकाकरण से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है. यह न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज को बीमारियों से सुरक्षित रखने का सामूहिक प्रयास है.
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