navjeevan hospital: बिहारशरीफ शहर के बहुचर्चित नवजीवन शिशु अस्पताल को आखिरकार बुधवार को सील कर दिया गया. कागजी मोहल्ला रोड, भैसासुर स्थित इस निजी अस्पताल पर नवजात की अदला-बदली और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप लगे थे. पटना हाइकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अस्पताल को पूरी तरह सील कर दिया.
कार्रवाई के दौरान अस्पताल के अंदर का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गये. जांच के दौरान अस्पताल में कोई मेडिकल उपकरण, आईसीयू, वेंटिलेटर या नवजात से संबंधित मशीन नहीं मिली. प्रशासन को आशंका है कि कार्रवाई की भनक लगने के बाद अस्पताल संचालकों ने पहले ही उपकरण हटवा दिये.
डीएम के आदेश पर गठित की गयी थी टीम
जिला पदाधिकारी के आदेश के आलोक में अनुमंडल पदाधिकारी, बिहारशरीफ ने तीन सितंबर को ज्ञापांक जारी कर अस्पताल की सीलिंग के लिए तीन दंडाधिकारियों की टीम गठित की थी. अंचलाधिकारी लखेंद्र कुमार को वरीय दंडाधिकारी बनाया गया था. वहीं, मनरेगा पीओ संजय कुमार और श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सतीश कुमार सिंह को सहयोगी दंडाधिकारी की जिम्मेदारी दी गयी थी.
पुलिस बल के साथ पहुंची टीम, करायी गयी वीडियोग्राफी
बुधवार को दंडाधिकारियों की टीम बिहार थाना की महिला और पुरुष पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंची. पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी करायी गयी. इसके बाद पारदर्शिता के साथ अस्पताल के मुख्य द्वार पर सील लगा दी गयी. वरीय दंडाधिकारी लखेंद्र कुमार ने बताया कि उच्च न्यायालय और जिलाधिकारी के निर्देश पर अस्पताल को सील करने की कार्रवाई पूरी की गयी है.
अस्पताल में नहीं मिले आईसीयू और वेंटिलेटर
जांच के दौरान अस्पताल के अंदर मेडिकल उपकरण, आईसीयू, वेंटिलेटर और नवजात से जुड़ी मशीनें नहीं मिलीं. परिसर में केवल कुछ दवाइयां, कुर्सी-टेबल, पंखे और एसी ही मिले. अधिकारियों ने आशंका जतायी कि प्रशासनिक कार्रवाई की भनक लगने के बाद अस्पताल में मौजूद उपकरण पहले ही हटा दिये गये होंगे.
मौजूद सामान की तैयार की गयी जब्ती सूची
प्रशासन ने अस्पताल में मौजूद सामान की जब्ती सूची तैयार कर ली है. इस सूची को सिविल सर्जन और हाइकोर्ट को भेजा जायेगा. इसके साथ ही अस्पताल से मेडिकल उपकरण कहां और किस तरह हटाये गये, इसकी अलग से जांच शुरू कर दी गयी है.
