राजगीर में फिर लौटी मलमास मेले की रौनक, आंधी के बाद प्रशासनिक तत्परता से व्यवस्थाएं दुरुस्त, शनिवार की छुट्टी पर उमड़ा जनसैलाब

Malmas Mela 2026: नालंदा के राजगीर में शुक्रवार को आई आंधी-बारिश के बाद शनिवार को राजकीय मलमास मेला एक बार फिर पूरी रौनक के साथ गुलजार हो गया. शनिवार की छुट्टी के कारण ब्रह्मकुंड और सप्तऋषि कुंड में स्नान के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी. प्रशासन ने तकनीकी जांच के बाद सुरक्षा के लिहाज से बंद किए गए टावर झूला और ब्रेक डांस को दोबारा शुरू करवा दिया है. मेला क्षेत्र में सुरक्षा के लिए दंडाधिकारी और पुलिस बल तैनात हैं, वहीं बिना पास के वाहनों के प्रवेश पर सख्त पाबंदी लागू है.

Malmas Mela 2026(रामविलास): नालंदा जिले के सुप्रसिद्ध पर्यटक शहर राजगीर में आयोजित ऐतिहासिक राजकीय मलमास मेला एक बार फिर पूरी भव्यता और रौनक के साथ जीवंत हो उठा है. शुक्रवार की शाम आई तेज आंधी और मूसलाधार वर्षा के कारण मेले की गतिविधियां कुछ समय के लिए थमी जरूर थीं, लेकिन जिला प्रशासन की त्वरित तत्परता के बाद शनिवार को स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई. शनिवार को साप्ताहिक अवकाश (छुट्टी) होने के कारण सुबह से ही मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं, देश-विदेश के पर्यटकों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे पूरा परिसर गुलजार हो गया है.

प्रशासनिक हरी झंडी के बाद फिर चालू हुए टावर झूला और ब्रेक डांस

शुक्रवार की शाम आए तूफान के बाद सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने एहतियातन टावर झूला, ब्रेक डांस सहित कई बड़े और ऊंचे मनोरंजन उपकरणों के संचालन पर अस्थायी रोक लगा दी थी. शनिवार को गहन तकनीकी जांच और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की पहल के बाद इन सभी झूलों और मनोरंजन प्रतिष्ठानों को पुनः चालू करने की अनुमति दे दी गई.  झूलों के शुरू होते ही मेले में दोबारा जबरदस्त चहल-पहल लौट आई है और बच्चों से लेकर युवाओं तक में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है. मेला क्षेत्र में पूर्व की भांति सुचारू रूप से बिजली और शुद्ध पेयजल की आपूर्ति भी बहाल कर दी गई है. हालांकि, आंधी में ध्वस्त हुआ मुख्य तोरण द्वार घटना के दूसरे दिन भी पूरी तरह तैयार नहीं किया जा सका था, जिसे दुरुस्त करने का काम जारी है.

अध्यात्म और मनोरंजन का अनूठा संगम, कुंडों में उमड़े श्रद्धालु

बारिश के बाद भले ही मौसम फिर से गर्म हो गया है, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था के आगे भीषण गर्मी भी बेअसर साबित हो रही है. मेला क्षेत्र में दिनभर लोगों की आवाजाही बनी हुई है और शाम होते ही यह भीड़ जनसैलाब में तब्दील हो जा रही है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु ब्रह्मकुंड, सप्तऋषि कुंड और अन्य पवित्र गर्म जलकुंडों व नदियों में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ कमा रहे हैं. मेले के आध्यात्मिक शिविरों में भी फिर से वैदिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और कथा वाचन का दिव्य दौर आरंभ हो गया है.

दूसरी तरफ, मनोरंजन सेक्टर में थिएटर, सर्कस, जादूगर शो, जलपरी और लजीज खानपान की दुकानों पर पैर रखने की जगह नहीं मिल रही है. रंग-बिरंगी रोशनी और लाउडस्पीकरों की गूंज से पूरा मेला परिसर उत्सव के रंग में डूबा नजर आ रहा है.

सुरक्षा के कड़े इंतजाम: बिना पास वाले वाहनों की एंट्री पर पूर्ण रोक

मेले में बढ़ती भीड़ को देखते हुए राजगीर प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह सतर्क और मुस्तैद दिखे. मेला परिसर के विभिन्न संवेदनशील पॉइंट और वॉच टावरों पर दंडाधिकारियों (Magistrates) के साथ भारी संख्या में सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती की गई है.

यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए जिला प्रशासन के आदेशानुसार बिना पास वाले वाहनों का मेला क्षेत्र में प्रवेश पूरी तरह वर्जित कर दिया गया है. पुलिसकर्मी इस आदेश का सख्ती से अनुपालन करा रहे हैं ताकि पैदल चल रहे श्रद्धालुओं और कतारों में खड़े लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा या जाम का सामना न करना पड़े. शनिवार को उमड़े इस ऐतिहासिक हुजूम ने यह साफ कर दिया कि राजगीर का यह मलमास मेला श्रद्धा, सनातन आस्था और लोक-मनोरंजन का एक अद्भुत और अद्वितीय संगम बन चुका है.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

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