नालंदा से रामविलास की रिपोर्ट
Nalanda Rajgir Magahi University Demand News: नालंदा जिले के राजगीर में भाषाई आंदोलन के गलियारे से मगध की मिट्टी, संस्कृति और गौरवशाली इतिहास से जुड़ी खबर सामने आई है. मगही भाषा के संरक्षण, अकादमिक विकास को धार देने के लिए अब सूबे में एक पूर्ण ‘मगही विश्वविद्यालय’ (Magahi University) की स्थापना की मांग ने जोर पकड़ लिया है. बिहारी वेलफेयर सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मगही भाषा आंदोलन के प्रमुख संजय भाई ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए भाषाई उपेक्षा के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है.
समृद्ध इतिहास के बावजूद विलुप्ति के कगार पर मगही भाषा
राजगीर में आयोजित मुख्य बैठक को संबोधित करते हुए आंदोलन के प्रणेता संजय भाई ने गंभीर चिंताएं जाहिर की हैं. उन्होंने कहा कि अपने अत्यंत समृद्ध इतिहास और करोड़ों के व्यापक जनाधार के बावजूद मगही भाषा आज प्रशासनिक स्तर पर उपेक्षा का दंश झेल रही है. संस्थागत पहलों की कमी के कारण यह लोकभाषा धीरे-धीरे विलुप्ति के कगार पर पहुंच रही है.
उनका मानना है कि एक स्वतंत्र विश्वविद्यालय की स्थापना होने से मगही भाषा के गहन अध्ययन, कड़े शोध, उच्च साहित्य सृजन तथा नई पीढ़ी में इसके प्रचार-प्रसार को एक नई और दिशा मिलेगी.
संविधान की आठवीं अनुसूची में मान्यता न मिलना चिंता का विषय
संजय भाई ने कहा कि मगही को अभी तक भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान नहीं मिल सका है. इसके साथ ही यूजीसी-नेट (UGC-NET) जैसी राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक परीक्षाओं में भी इसे स्वतंत्र विषय के रूप में मान्यता नहीं दी गई है, जो पूरे मगध क्षेत्र के भाषा प्रेमियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर पर भाषाई असमानता और घोर उपेक्षा का सीधा प्रतीक बताया. उन्होंने साफ किया कि मगही केवल एक आम बोली नहीं, बल्कि भगवान बुद्ध की ज्ञानभूमि-तपोभूमि तथा भगवान महावीर की कर्मभूमि की महान लोकभाषा रही है.
बिहार और झारखंड के इन 18 जिलों में है व्यापक प्रभाव
आंदोलन की रूपरेखा तय करते हुए पदाधिकारियों ने बताया कि मगही भाषा का दायरा बेहद विस्तृत है.
यह लोकभाषा बिहार के नालंदा, गया, नवादा, औरंगाबाद, अरवल, जहानाबाद, पटना, शेखपुरा, मुंगेर, जमुई और लखीसराय सहित कई जिलों में मुख्य रूप से बोली जाती है. इसके अलावा पड़ोसी राज्य झारखंड के हजारीबाग, चतरा, कोडरमा, पलामू, गढ़वा, बोकारो और धनबाद जैसे बड़े क्षेत्रों में भी इसकी व्यापक उपस्थिति है.
संजय भाई ने इन सभी 18 जिलों के करोड़ों मगही भाषियों, युवाओं और बुद्धिजीवियों से इस कड़े भाषा आंदोलन से सीधे जुड़ने और मगही विश्वविद्यालय की स्थापना के संकल्प को पूरा कराने के लिए एक संगठित आवाज उठाने का आह्वान किया है.
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