Nalanda News (रामविलास की रिपोर्ट): पुरुषोत्तम मलमास मेला में 11 जून को होने वाले दूसरी पुरुषोत्तम एकादशी के शाही स्नान को लेकर बुधवार को अनुमंडलीय सभागार में प्रशासन और संत समाज के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में शाही स्नान की व्यवस्था, सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की गई.
शाही स्नान के लिए प्रशासन ने किए व्यापक इंतजाम
बैठक की अध्यक्षता करते हुए एसडीओ सूर्य प्रकाश गुप्ता और डीएसपी संजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि पहली पुरुषोत्तम एकादशी की तरह इस बार भी सभी अखाड़ों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित कर शाही स्नान कराया जाएगा. साधु-संतों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं. अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि शाही स्नान के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होने दी जाएगी और सभी व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जाएगी.
संत समाज ने मांसाहार बिक्री पर रोक की उठाई मांग
बैठक में संत समाज ने धार्मिक मर्यादा और आध्यात्मिक वातावरण बनाए रखने को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रशासन के समक्ष रखे. जगद्गुरु विश्वकर्मा शंकराचार्य स्वामी दिलीप योगीराज ने कहा कि राजगीर का मलमास मेला प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, देवघर और सिमरिया की तरह एक बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन है. ऐसे में मेला अवधि के दौरान मीट, मछली, मुर्गा और अंडा जैसे मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाई जानी चाहिए.
पिछले मेले का भी दिया हवाला
स्वामी दिलीप योगीराज ने कहा कि पिछले मलमास मेले में प्रशासन द्वारा मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया था, जबकि इस बार खुलेआम बिक्री हो रही है. उन्होंने कहा कि इससे मेले की धार्मिक गरिमा प्रभावित हो रही है.
धार्मिक पवित्रता बनाए रखने पर जोर
महामंडलेश्वर स्वामी अंतर्यामी शरण जी महाराज ने कहा कि पुरुषोत्तम मास मेला को उसकी आध्यात्मिक गरिमा के अनुरूप संचालित किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह संतों, श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमियों की आस्था का पर्व है, इसलिए इसकी धार्मिक पवित्रता अक्षुण्ण रहनी चाहिए. संतों ने कहा कि मेला क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर श्रीराम कथा और श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हो रहा है. ऐसे माहौल में मांसाहार की बिक्री धर्म प्रचार-प्रसार की भावना के विपरीत है.
पेयजल और यातायात व्यवस्था को लेकर भी सुझाव
संत समाज ने प्रशासन से पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में सुधार की मांग की. साथ ही आगामी शाही स्नान के दिन पूर्वाह्न 11 बजे तक टमटम परिचालन पर रोक लगाने का सुझाव दिया, ताकि साधु-संतों का स्नान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके.
कई संत और महंत रहे मौजूद
बैठक में जगद्गुरु विश्वकर्मा शंकराचार्य स्वामी दिलीप योगीराज, महामंडलेश्वर अंतर्यामी शरण जी महाराज, महामंडलेश्वर विवेक मुनि जी महाराज, महंत गजेंद्र दास, महंत सुमन दास, महंत वाल्मीकि दास, महंत अर्जुन दास, औघड़ प्रेम दास सिमरिया सहित कई संत और महंत मौजूद रहे. सभी ने सफल, सुरक्षित और आध्यात्मिक वातावरण में शाही स्नान संपन्न कराने की आवश्यकता पर बल दिया.
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