'भारतनेट योजना' के तहत पांच साल बाद भी कई पंचायतें इंटरनेट से वंचित, डिजिटल कनेक्टिविटी का सपना अधूरा

Nalanda News : ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई भारतनेट परियोजना नालंदा जिले में अब तक पूरी रफ्तार नहीं पकड़ सकी है. करीब पांच साल बीत जाने के बावजूद जिले की कई पंचायतें अब भी बेहतर इंटरनेट सुविधा से नहीं जुड़ पाई हैं. दिशा (जिला विकास समन्वय एवं निगरानी) बैठक में पेश रिपोर्ट ने परियोजना की धीमी प्रगति और जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है.

Nalanda News : (कंचन कुमार) ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई भारतनेट परियोजना नालंदा जिले में अब तक पूरी रफ्तार नहीं पकड़ सकी है. करीब पांच साल बीत जाने के बावजूद जिले की कई पंचायतें अब भी बेहतर इंटरनेट सुविधा से नहीं जुड़ पाई हैं. दिशा (जिला विकास समन्वय एवं निगरानी) बैठक में पेश रिपोर्ट ने परियोजना की धीमी प्रगति और जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है.

269 पंचायतों में अब भी अधूरी है कनेक्टिविटी

रिपोर्ट के अनुसार जिले की कुल 269 पंचायतों में से 131 पंचायतों को पहले चरण और 138 पंचायतों को दूसरे चरण में शामिल किया गया था. इसके बावजूद अब तक केवल 1031 इंटरनेट कनेक्शन ही चालू हो सके हैं. राजगीर में 251 और सिलाव में 276 कनेक्शन सक्रिय बताए गए हैं, जबकि कई प्रखंडों में अब भी इंटरनेट सेवा बेहद कमजोर बनी हुई है.

कई प्रखंडों में नेटवर्क सेवा पूरी तरह ठप

जिले के कई प्रखंडों में भारतनेट की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. गिरियक में सिर्फ एक कनेक्शन चालू है, जबकि कतरीसराय और इस्लामपुर में एक भी कनेक्शन सक्रिय नहीं है. चंडी में केवल एक और थरथरी में दो कनेक्शन चालू बताए गए हैं. बिहारशरीफ ग्रामीण क्षेत्र की अधिकांश पंचायतों में भी नेटवर्क डाउन रहने की शिकायत सामने आई है. वहीं अस्थावां, बिंद और परवलपुर में सीमित स्तर पर ही इंटरनेट सुविधा उपलब्ध हो सकी है.

सरकारी सेवाएं हो रही प्रभावित

भारतनेट योजना की धीमी प्रगति का सीधा असर सरकारी सेवाओं और आम लोगों पर पड़ रहा है. पंचायत सरकार भवन, आरटीपीएस काउंटर, स्वास्थ्य केंद्र और भूमि संबंधी ऑनलाइन सेवाओं में नेटवर्क बाधा बड़ी समस्या बन गई है. मजबूरी में ग्रामीणों को अतिरिक्त पैसे खर्च कर निजी साइबर कैफे से ऑनलाइन आवेदन और अन्य जरूरी कार्य कराने पड़ रहे हैं.

2011 में शुरू हुई थी महत्वाकांक्षी योजना

भारतनेट परियोजना की शुरुआत वर्ष 2011 में एनओएफएन योजना के रूप में हुई थी, जिसे वर्ष 2015 में नया स्वरूप दिया गया. बिहार में वर्ष 2020 के बाद इस योजना को गति मिली, लेकिन नालंदा जिले के कई ग्रामीण इलाकों में अब तक डिजिटल कनेक्टिविटी पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है.

ग्रामीणों ने उठाए सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि डिजिटल इंडिया का सपना तभी साकार होगा, जब गांवों तक स्थायी और तेज इंटरनेट सुविधा पहुंचेगी. लोगों ने सरकार और संबंधित एजेंसियों से जल्द नेटवर्क व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है.

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Published by: Vivek Singh

विवेक सिंह माता सीता की धरती और मिथिला का द्वार कहे जाने वाले समस्तीपुर जिले से आते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले #The_Newsdharma के साथ डिजिटल मीडिया, ग्राउंड रिपोर्टिंग , और न्यूज़ लेखन के क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव रहा है. सामाजिक, राजनीतिक, शिक्षा, युवा, महिला सुरक्षा और जनता से जुड़े मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं. सरल, तथ्यात्मक और प्रभावी लेखन शैली के माध्यम से पाठकों तक महत्वपूर्ण खबरें और मुद्दे पहुंचाने का निरंतर प्रयास करते हैं. NGO अमर शहीद बिपिन सिंह फाउंडेशन के साथ जुड़कर सामाजिक, स्वास्थ्य, पर्यावरण ,रोजगार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर भी कार्य करने का अनुभव हैं.

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