नालंदा मॉडल सदर अस्पताल में डिजिटल व्यवस्था बनी मरीजों के लिए परेशानी

Nalanda News : बिहारशरीफ का मॉडल सदर अस्पताल आधुनिक सुविधाओं और डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों के साथ संचालित हो रहा है, लेकिन मरीजों के लिए यह व्यवस्था कई बार राहत की बजाय परेशानी का कारण बन रही है. ओपीडी पर्ची से लेकर डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने तक मरीजों को लंबी कतारों और तकनीकी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा है.

Nalanda News : (कंचन कुमार) बिहारशरीफ का मॉडल सदर अस्पताल आधुनिक सुविधाओं और डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों के साथ संचालित हो रहा है, लेकिन मरीजों के लिए यह व्यवस्था कई बार राहत की बजाय परेशानी का कारण बन रही है. ओपीडी पर्ची से लेकर डॉक्टर को दिखाने और दवा लेने तक मरीजों को लंबी कतारों और तकनीकी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा है. खासकर ग्रामीण, बुजुर्ग और स्मार्टफोन से दूर लोगों के लिए अस्पताल की डिजिटल व्यवस्था नई चुनौती बन गई है.

आभा ऐप बना मरीजों के लिए नई चुनौती

अस्पताल प्रशासन डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार करने के उद्देश्य से मरीजों को आभा ऐप डाउनलोड कर आधार से पंजीकरण कराने के लिए प्रेरित कर रहा है. इसके लिए अस्पताल परिसर में अलग डिजिटल काउंटर भी बनाया गया है. लेकिन जिन मरीजों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा नहीं है, उन्हें पर्ची बनवाने में अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ रही है. कई मरीजों का कहना है कि इलाज से पहले तकनीकी प्रक्रिया पूरी करना उनके लिए मुश्किल साबित हो रहा है.

ओपीडी मरीज घटे, इमरजेंसी मामलों में बढ़ोतरी

करीब 48 करोड़ रुपये की लागत से बने 200 शैय्या वाले जी-4 मॉडल अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. इसके बावजूद दो वर्ष पहले की तुलना में ओपीडी मरीजों की संख्या में 26 से 27 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. वहीं इमरजेंसी विभाग में मरीजों की संख्या 16 से 17 प्रतिशत तक बढ़ी है. वर्तमान में प्रतिदिन 600 से 650 मरीज ओपीडी और 75 से 100 मरीज इमरजेंसी विभाग में पहुंच रहे हैं.

डॉक्टर कम, सुरक्षा गार्ड ज्यादा

जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में लगभग 40 चिकित्सक कार्यरत हैं, जबकि यहां 150 सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं. मरीजों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होना जरूरी है, लेकिन मरीजों की सुविधा, मार्गदर्शन और इलाज की गुणवत्ता पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए.

निजी अस्पताल भेजने के आरोपों से बढ़ी चिंता

अस्पताल के कुछ कर्मियों पर मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करने के आरोप भी लग रहे हैं. विशेष रूप से प्रसव और बच्चों के इलाज से जुड़े मामलों में बेहतर सुविधा या आयुष्मान योजना का लाभ दिलाने का भरोसा देकर मरीजों को निजी संस्थानों में भेजे जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं. इससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं.

कमीशन आधारित रेफरल सिस्टम पर उठे सवाल

सूत्रों के अनुसार शहर के कुछ निजी अस्पतालों तक मरीज पहुंचाने में कथित कमीशन सिस्टम भी सक्रिय है. आरोप है कि मरीज की बीमारी और अस्पताल की प्रतिष्ठा के आधार पर कमीशन तय किया जाता है. यदि ऐसे आरोप सही हैं तो यह स्वास्थ्य सेवाओं की निष्पक्षता और मरीजों के हितों के लिए गंभीर चिंता का विषय है.

फर्जी क्लीनिकों पर कार्रवाई के बावजूद जारी गतिविधियां

स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर अवैध क्लीनिकों और बिना पंजीकरण संचालित संस्थानों पर कार्रवाई करता है, लेकिन कई मामलों में आरोप है कि कुछ क्लीनिक नाम और स्थान बदलकर फिर से संचालित होने लगते हैं. इससे मरीजों की सुरक्षा और उपचार की गुणवत्ता पर खतरा बना रहता है.

21 करोड़ के नए प्रोजेक्ट पर उठे सवाल

सदर अस्पताल परिसर में 75 शैय्या वाले क्रिटिकल केयर सेंटर के लिए 21 करोड़ रुपये की योजना प्रस्तावित है. हालांकि कई लोगों का मानना है कि नए प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले मौजूदा अस्पताल व्यवस्था को पूरी क्षमता और दक्षता के साथ संचालित करना अधिक जरूरी है.

सिविल सर्जन ने बताई डिजिटल व्यवस्था की जरूरत

सिविल सर्जन डॉ. जय प्रकाश का कहना है कि आभा ऐप के माध्यम से मरीजों का डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिससे भविष्य में इलाज और जांच से संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी. उन्होंने कहा कि सभी मरीजों की पर्ची बनाई जा रही है और किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.

अस्पताल प्रशासन ने समाधान का दिया भरोसा

अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि कई मरीज मोबाइल होने के बावजूद आभा ऐप डाउनलोड नहीं करते, इसलिए डिजिटल व्यवस्था को लागू करने के लिए कुछ सख्ती बरती जा रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी मरीज को पर्ची कटाने या इलाज में परेशानी होती है तो वह अस्पताल प्रबंधन से संपर्क कर सकता है. प्रशासन का दावा है कि मरीजों को बेहतर और व्यवस्थित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.

डिजिटल सुविधा और मानवीय संवेदनशीलता में संतुलन जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण से व्यवस्था बेहतर हो सकती है, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि तकनीक से दूर लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो. मॉडल अस्पताल की सफलता इसी बात पर निर्भर करेगी कि आधुनिक तकनीक और मरीजों की सहज पहुंच के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है.

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लेखक के बारे में

Published by: Vivek Singh

विवेक सिंह माता सीता की धरती और मिथिला का द्वार कहे जाने वाले समस्तीपुर जिले से आते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले #The_Newsdharma के साथ डिजिटल मीडिया, ग्राउंड रिपोर्टिंग , और न्यूज़ लेखन के क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव रहा है. सामाजिक, राजनीतिक, शिक्षा, युवा, महिला सुरक्षा और जनता से जुड़े मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं. सरल, तथ्यात्मक और प्रभावी लेखन शैली के माध्यम से पाठकों तक महत्वपूर्ण खबरें और मुद्दे पहुंचाने का निरंतर प्रयास करते हैं. NGO अमर शहीद बिपिन सिंह फाउंडेशन के साथ जुड़कर सामाजिक, स्वास्थ्य, पर्यावरण ,रोजगार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर भी कार्य करने का अनुभव हैं.

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