Nalanda News (कंचन कुमार) : नालंदा जिले के पत्रकारों की सुविधा और मीडिया गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2015-16 में करीब 67 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से निर्मित बिहारशरीफ प्रेस क्लब भवन प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ चुका है. शनिवार, 30 मई को ‘हिंदी पत्रकारिता दिवस’ के पावन अवसर पर भी इस आलीशान भवन में बड़ा सा ताला लटका रहा, जिसे देखकर स्थानीय पत्रकारों में गहरी निराशा और आक्रोश देखा गया. निर्माण कार्य पूरा होने के दस वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक इस सरकारी भवन का उपयोग शुरू नहीं हो सका है, जिसके कारण इसकी उपेक्षा अब भवन के धुंधले पड़ चुके नामपट्ट पर भी साफ दिखाई देने लगी है.
सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस है भवन, लेकिन अब तक नहीं हो सका उद्घाटन
प्रेस क्लब भवन को पत्रकारों के संवाद, तकनीकी प्रशिक्षण, कार्यशाला और महत्वपूर्ण बैठकों का एक मुख्य केंद्र बनाने की योजना थी. इसके तहत भवन के भीतर एक बड़ा आधुनिक बैठक हॉल (कॉन्फ्रेंस रूम), सुसज्जित कार्यालय, बड़े कमरे, शौचालय और अत्याधुनिक रसोईघर जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की गई थीं. आश्चर्य की बात यह है कि निर्माण कार्य पूर्ण होने के वर्षों बाद भी आज तक इस भव्य भवन का औपचारिक उद्घाटन नहीं किया जा सका है. किसी भी स्थानीय या पंजीकृत पत्रकार संगठन को इसके संचालन और देखरेख की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई, जिसके कारण लाखों की लागत से बनी यह परियोजना आज सिर्फ एक शोपीस बनकर रह गई है.
बिजली-पानी का कनेक्शन तक नहीं, देखरेख के अभाव में जर्जर हो रही दीवारें
नियमित रख-रखाव और साफ-सफाई नहीं होने के कारण प्रेस क्लब भवन की स्थिति लगातार दयनीय होती जा रही है. देखरेख के अभाव में आलीशान कमरों की दीवारों में लंबी-लंबी दरारें पड़ने लगी हैं और दीवारों का रंग-रोगन (पेंट) उखड़कर गिर रहा है. इसके साथ ही भवन के कीमती दरवाजे और खिड़कियां भी धीरे-धीरे सड़कर जर्जर हो रही हैं. विडंबना यह है कि इतने साल बीत जाने के बाद भी इस सरकारी भवन में बिजली और पानी की स्थायी व्यवस्था तक बहाल नहीं की जा सकी है. इन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में भवन पूरी तरह से अनुपयोगी बना हुआ है, जो सरकारी राशि के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
विभागीय निर्देशों का असर शून्य, कमजोर पड़ गई संवाद की गौरवशाली परंपरा
स्थानीय वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि पूर्व में हिंदी पत्रकारिता दिवस के विशेष अवसर पर जिला प्रशासन और मीडिया जगत के बीच एक जीवंत संवाद कार्यक्रम आयोजित करने की गौरवशाली परंपरा थी, जो पिछले कुछ वर्षों से प्रशासनिक शिथिलता के कारण लगभग समाप्त हो गई है. बीते वर्ष राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) ने प्रेस क्लबों के सुचारू संचालन के लिए जिला जनसंपर्क पदाधिकारी (DPRO) को कड़े दिशा-निर्देश और बकायदा गाइडलाइन भी जारी की थी, जिसमें भवनों की मरम्मत कराने और बिजली-पानी जैसी सुविधाएं तुरंत बहाल करने की बात कही गई थी. बावजूद इसके, नालंदा जिला प्रशासन स्तर पर अब तक कोई ठोस जमीनी पहल नजर नहीं आ रही है.
हिंदी पत्रकारिता दिवस पर पत्रकारों ने की भवन को जल्द चालू करने की पुरजोर मांग
प्रेस क्लब के संचालन की व्यवस्था ठप रहने से नाराज नालंदा के मीडियाकर्मियों ने हिंदी पत्रकारिता दिवस के मौके पर जिला प्रशासन और राज्य सरकार से इस भवन को अविलंब चालू करने की सामूहिक मांग उठाई है. पत्रकारों का साफ कहना है कि उनके हितों और अधिकारों के लिए निर्मित इस सरकारी संपत्ति को इस तरह लावारिस और उपेक्षित छोड़ना कतई न्यायसंगत नहीं है. उन्होंने मांग की है कि विभाग जल्द से जल्द किसी पंजीकृत पत्रकार संगठन के साथ समन्वय स्थापित कर संचालन की प्रक्रिया को पूरा करे, ताकि स्थानीय पत्रकारों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके.
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