नालंदा में ई-ग्राम कचहरी : 1,798 मामलों में सिर्फ 868 का निपटारा, आधे से ज्यादा विवाद अब भी लंबित, ग्रामीण न्याय व्यवस्था पर सवाल

नालंदा में ई-ग्राम कचहरी योजना का बुरा हाल, 1798 में से आधे से अधिक मामले अभी भी लंबित हैं। जानिए किस प्रखंड का प्रदर्शन सबसे खराब रहा।

ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन, रास्ता, मारपीट और छोटे दीवानी-फौजदारी विवादों का पंचायत स्तर पर त्वरित समाधान करने के उद्देश्य से शुरू की गई ई-ग्राम कचहरी व्यवस्था नालंदा जिले में अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी है. योजना लागू होने के डेढ़ वर्ष से अधिक समय बाद भी जिले में दर्ज आधे से अधिक मामले लंबित हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 20 प्रखंडों में अब तक 1,798 मामले दर्ज हुए, लेकिन इनमें से केवल 868 मामलों का ही निष्पादन हो सका. जिले की औसत निष्पादन दर महज 48.3 प्रतिशत रही है.

ग्रामीणों को अदालत से राहत देने के लिए शुरू हुई थी व्यवस्था

ई-ग्राम कचहरी व्यवस्था का उद्देश्य छोटे-छोटे विवादों का समाधान पंचायत स्तर पर कर ग्रामीणों को थाना और अदालत के चक्कर से बचाना था. पंच, सरपंच, न्याय मित्र, पंचायत सचिव और प्रखंड स्तर के अधिकारियों की निगरानी में संचालित इस व्यवस्था के बावजूद कई प्रखंडों में मामलों के निपटारे की रफ्तार बेहद धीमी है. इससे ग्रामीणों का भरोसा भी प्रभावित हो रहा है.

25 अक्टूबर 2024 को शुरू हुआ था ई-ग्राम कचहरी पोर्टल

तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 25 अक्टूबर 2024 को पंचायती राज विभाग के तहत ई-ग्राम कचहरी पोर्टल का शुभारंभ किया था. इसके बाद 1 नवंबर 2024 से इसे राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में लागू किया गया. योजना का उद्देश्य पंचायत स्तर पर छोटे दीवानी और फौजदारी मामलों का त्वरित समाधान कर अदालतों का बोझ कम करना था.

दीवानी मामलों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा

जिले में दर्ज कुल 1,798 मामलों में 1,370 दीवानी और 428 फौजदारी मामले शामिल हैं. यानी कुल मामलों में 76.2 प्रतिशत हिस्सेदारी दीवानी विवादों की रही, जबकि 23.8 प्रतिशत मामले फौजदारी श्रेणी के हैं. इनमें दीवानी मामलों के 672 और फौजदारी मामलों के केवल 196 मामलों का ही निष्पादन हो पाया है.

बिहारशरीफ ने किया 100 प्रतिशत निपटारा

नूरसराय में सबसे अधिक 232 मामले दर्ज हुए, जिनमें 120 मामलों का निष्पादन हुआ और निष्पादन दर 51.72 प्रतिशत रही. वहीं बिहारशरीफ प्रखंड ने सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए दर्ज सभी 64 मामलों का निपटारा कर 100 प्रतिशत निष्पादन दर हासिल की. इसके अलावा राजगीर (80%), बिंद (75%), कतरीसराय (72.22%) और सरमेरा (70.37%) भी बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रखंडों में शामिल रहे.

अस्थावां सबसे पीछे, कई प्रखंडों की स्थिति चिंताजनक

अस्थावां में 37 मामले दर्ज होने के बावजूद एक भी मामले का निष्पादन नहीं हो सका. चंडी में 81 में से केवल 11 मामलों का निपटारा हुआ. हरनौत में 49 मामलों में सिर्फ 10 मामलों का निष्पादन हुआ, जबकि एक भी फौजदारी मामला नहीं सुलझाया जा सका. परबलपुर और इस्लामपुर की निष्पादन दर भी जिले के औसत से काफी कम रही.

गिरियक में सबसे ज्यादा फौजदारी, नूरसराय में सबसे अधिक दीवानी मामले

फौजदारी मामलों में गिरियक प्रखंड सबसे आगे रहा, जहां 44 मामले दर्ज हुए और 26 का निपटारा किया गया. थरथरी में 41 और हिलसा में 38 फौजदारी मामले दर्ज हुए. वहीं दीवानी मामलों में नूरसराय सबसे ऊपर रहा, जहां 196 मामले दर्ज किए गए.

नियमित समीक्षा और जवाबदेही जरूरी

आंकड़े बताते हैं कि अलग-अलग प्रखंडों में ई-ग्राम कचहरी की कार्यप्रणाली में बड़ा अंतर है. विशेषज्ञों का मानना है कि लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए नियमित समीक्षा, पंच-सरपंच और न्याय मित्रों की जवाबदेही तय करने के साथ तकनीकी निगरानी मजबूत करनी होगी. अन्यथा ग्रामीण फिर छोटे-छोटे विवादों के समाधान के लिए थाना और अदालत का रुख करने को मजबूर होंगे.


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By कंचन कुमार

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