Nalanda News: नालंदा जिला न्यायालय में मुकदमों के लंबित रहने का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है. राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) की ताजा रिपोर्ट से नालंदा कोर्ट में लंबित मामलों की बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, जिला न्यायालय में इस समय कुल 1,28,075 मुकदमे लंबित पड़े हैं. इनमें 1,15,702 आपराधिक और 12,373 दीवानी (सिविल) मामले शामिल हैं. कुल लंबित मुकदमों में से 84.55 प्रतिशत केस एक वर्ष से अधिक समय से न्याय की आस में अटके हुए हैं.
मुकदमों के आने की रफ्तार अधिक, निस्तारण की गति धीमी
एनजेडीजी के आंकड़ों के मुताबिक, नालंदा जिला न्यायालय में रोजाना औसतन 76 नए मुकदमे दर्ज किए जाते हैं, जबकि प्रतिदिन औसतन केवल 71 मामलों का ही निस्तारण हो पाता है. इस तरह प्रतिदिन 5 से 6 नए लंबित मामले पिछले बकाए में जुड़ रहे हैं. अगर पिछले महीने की बात करें तो कोर्ट में कुल 2,288 नए मामले (2,056 आपराधिक और 232 दीवानी) आए, जबकि इस दौरान केवल 2,123 मामलों (1,909 आपराधिक और 214 दीवानी) का ही निपटारा हो सका. यानी आए मामलों की तुलना में 165 केस कम निपटाए जा सके, जिससे लंबित मामलों का ग्राफ और ऊपर चला गया.
5 से 10 वर्ष पुराने मामलों की हिस्सेदारी सबसे अधिक 31 फीसदी
रिपोर्ट विश्लेषण के अनुसार, कोर्ट में वर्षों से लंबित पड़े मुकदमों की स्थिति काफी गंभीर है. कुल लंबित मुकदमों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी 5 से 10 वर्ष पुराने मामलों की है, जो 31 प्रतिशत है. इसके बाद 10 वर्ष से अधिक पुराने मामले 21 प्रतिशत, 1 से 3 वर्ष पुराने मामले 18 प्रतिशत, 3 से 5 वर्ष पुराने मामले 15 प्रतिशत और 1 वर्ष से कम पुराने मामले 15 प्रतिशत हैं. दीवानी मुकदमों में 77.71 प्रतिशत और आपराधिक मुकदमों में 85.28 प्रतिशत मामले 1 वर्ष से अधिक समय से पेंडिंग हैं.
1,514 मामलों की सुनवाई की तारीख तक तय नहीं
अदालत में प्रक्रियात्मक देरी की स्थिति यह है कि 1,514 ऐसे मुकदमे हैं, जिनमें सुनवाई की कोई तिथि अब तक तय ही नहीं की जा सकी है. इनमें 1,304 आपराधिक और 210 दीवानी मामले शामिल हैं. इसके अतिरिक्त 5,466 मामलों में कोर्ट द्वारा सुनवाई की अत्यधिक लंबी तारीखें दी गई हैं. एनजेडीजी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में महिलाओं द्वारा दायर 6,738 मामले (3,016 दीवानी, 3,722 आपराधिक) और वरिष्ठ नागरिकों द्वारा दायर 3,312 मामले (2,231 दीवानी, 1,081 आपराधिक) भी न्याय के इंतजार में लंबित हैं.
60 प्रतिशत मामलों का बिना विवाद हुआ निस्तारण, जानकारों ने दी सलाह
पिछले माह निस्तारित कुल 2,123 मुकदमों में से 60 प्रतिशत (1,268 मामले) का निपटारा बिना किसी वाद-विवाद या अप्रतिस्पर्धी श्रेणी के तहत हुआ, जबकि 40 प्रतिशत (855 मामले) का निस्तारण प्रतिस्पर्धी न्यायिक प्रक्रिया से हुआ. मामले पर कानूनी जानकारों का कहना है कि लंबित मामलों के बोझ को कम करने के लिए लोक अदालतों का व्यापक संचालन, वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR), विशेष निस्तारण अभियान और पर्याप्त न्यायिक अधिकारियों व कर्मचारियों की नियुक्ति बेहद जरूरी है.
