राजगीर में एएसआई के प्रतिबंधित क्षेत्र में चबूतरा निर्माण पर घमासान, तोड़ने के बाद उठे जिम्मेदारी के सवाल

Bihar Sharif News : राजगीर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के प्रतिबंधित क्षेत्र में बने पक्के चबूतरे को ध्वस्त कर दिया गया है. नगर परिषद द्वारा निर्माण से इनकार के बाद अब असली जिम्मेदार कौन है, इस पर सवाल उठ रहे हैं.

Bihar Sharif News : राजगीर स्थित गुप्ती महारानी मंदिर के समीप भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के प्रतिबंधित क्षेत्र में बने पक्के चबूतरे को ध्वस्त किए जाने के बाद मामला नए मोड़ पर पहुंच गया है. नगर परिषद द्वारा इस निर्माण से अपना संबंध होने से इनकार किए जाने के बाद अब पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं. शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि चबूतरे का निर्माण नगर परिषद ने नहीं कराया, तो आखिर इसे किस एजेंसी ने बनवाया और किसके निर्देश पर निर्माण कार्य कराया गया. लोग यह भी जानना चाहते हैं कि प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति निर्माण कार्य आखिर कैसे शुरू हो गया.

नगर परिषद ने निर्माण से किया साफ इंकार

नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अजीत कुमार ने स्पष्ट कहा है कि संबंधित चबूतरे का निर्माण नगर परिषद द्वारा नहीं कराया गया है. उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए नगर परिषद की ओर से न तो कोई वर्क ऑर्डर जारी किया गया और न ही किसी प्रकार का भुगतान किया गया है. ऐसे में इस निर्माण से नगर परिषद का कोई संबंध नहीं है.

एएसआई का दावा, पहले ही रोक दिया था निर्माण

दूसरी ओर एएसआई का कहना है कि निर्माण एजेंसी को पहले ही प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण नहीं करने की चेतावनी दी गई थी. इसके बावजूद निर्माण कार्य किया गया. ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि निर्माण पर रोक लगा दी गई थी, तो फिर निर्माण कार्य पूरा कैसे हो गया.

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प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण को लेकर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि एएसआई के संरक्षित और प्रतिबंधित क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण करने के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होती है. ऐसे में संबंधित विभागों और अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई की जाती तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती.

निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग

नगर परिषद के बयान के बाद अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर निर्माण कराने वाली एजेंसी कौन है और इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी. वार्ड पार्षद डॉ. अनिल कुमार, युवा राजद के प्रदेश सचिव गोलू यादव, जन सुराज के उपेन्द्र कुमार विभूति, उपेन्द्र यादव सहित कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक चबूतरे के निर्माण का नहीं, बल्कि ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा और सरकारी जवाबदेही से भी जुड़ा है. यदि नगर परिषद का दावा सही है तो जिला और अनुमंडल प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण किस एजेंसी ने कराया और किन परिस्थितियों में इसकी अनुमति मिली. साथ ही दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई है.

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By Ramvilas prasad

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