बिहारशरीफ के जिराइन नदी में इस वर्ष पानी आने से बिंद प्रखंड क्षेत्र के किसानों के चेहरे पर खुशी लौट आई है. नदी में पानी रहने से खरीफ फसल की सिंचाई के लिए किसानों को राहत मिली है.
खासकर धान की फसल के लिए नदी का पानी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है. बारिश कम होने की स्थिति में यह नदी किसानों के लिए वैकल्पिक सिंचाई का बड़ा साधन बन गई है.
क्षेत्र की पांच प्रमुख नदियां और सिंचाई
प्रखंड क्षेत्र में जिराइन, कुम्हारी, गोइठवा, नोनिया और पंचमी सोइयावा समेत पांच प्रमुख बरसाती नदियां बहती हैं. इन नदियों से क्षेत्र के हजारों किसानों की खेती जुड़ी हुई है.
बरसात के दिनों में नदियों में पानी रहने से खेतों की सिंचाई के लिए प्राकृतिक जलस्रोत उपलब्ध होता है. जिराइन नदी में पानी आने के बाद आसपास के खेतों में सिंचाई की उम्मीद बढ़ गई है और किसान नदी के पानी का उपयोग कर रहे हैं.
भू-गर्भीय जलस्तर में सुधार और अन्य फायदे
किसानों का कहना है कि नदी में पानी रहने का फायदा केवल खेती तक सीमित नहीं है. इससे आसपास के गांवों में भू-गर्भीय जलस्तर में भी सुधार होता है. चापाकल, कुएं और बोरिंग में पानी का स्तर बेहतर होने की संभावना रहती है.
सूखे पड़े बोरिंग में पानी आने तथा बंद पड़े नलकूपों के दोबारा चालू होने की उम्मीद भी बढ़ जाती है. वहीं, नदी का पानी पशु-पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के लिए भी उपयोगी है.
किसानों ने जताई फसल बचने की उम्मीद
किसान गोपाल कुमार, बबलू कुमार, दयानंद पासवान, रामकृष्ण प्रसाद सिन्हा, नवल सिंह, पुरुषोत्तम सिंह, राजेंद्र प्रसाद, सूर्यमणि कुमार, संजय कुमार और मनोज कुमार ने बताया कि जिराइन नदी में पानी आने से इस वर्ष धान की खेती को काफी राहत मिलेगी. यदि लंबे समय तक नदी में पानी बना रहा तो फसल को बचाने में काफी मदद मिलेगी.
