स्वामी विवेकानंद का सार्वभौमिक संदेश भारतीय व जापानी बौद्ध परंपराओं को सुदृढ़ करता है : प्रो सिद्धार्थ सिंह

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कृति और दर्शन के विविध आयामों पर सारगर्भित विचार-विमर्श हुआ

By AMLESH PRASAD | January 13, 2026 11:03 PM

राजगीर. नव नालंदा महाविहार में स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती के अवसर पर एकेडमिक कार्यक्रम के साथ राष्ट्रीय युवा दिवस गरिमामय वातावरण में मनाया गया. इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा, संस्कृति और दर्शन के विविध आयामों पर सारगर्भित विचार-विमर्श हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह ने की. उन्होंने कार्यक्रम के इंटरडिसिप्लिनरी स्वरूप की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन स्वामी विवेकानंद के विचारों को समकालीन संदर्भों से जोड़ने का सशक्त प्रयास है. कुलपति प्रो सिंह ने कहा कि प्राचीन नालंदा की गौरवशाली विरासत से जुड़ा नव नालंदा महाविहार, स्वामी विवेकानंद के सार्वभौमिक संदेशों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करने और भारतीय व जापानी बौद्ध परंपराओं के बीच संवाद को सुदृढ़ करने के लिए विशिष्ट रूप से स्थित है. उन्होंने भारतीय दूतावास, जापान में विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक के रूप में अपने कार्यकाल को भी स्मरण किया और अपने अनुभव साझा किये. उन्होंने बताया कि जापानी समाज भारत, बौद्ध धर्म तथा स्वामी विवेकानंद के विचारों को गहरी रुचि और सम्मान के साथ देखता है. कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्वी एशियाई अध्ययन विभाग की प्रमुख प्रो रंजना मुखोपाध्याय ने स्वामी विवेकानंद और बौद्ध धर्म विषय पर विशेष व्याख्यान दिया. उन्होंने विवेकानंद द्वारा करुणा, अद्वैतवाद और नैतिक जीवन जैसे बौद्ध विचारों की व्याख्या पर प्रकाश डालते हुए जापानी बौद्ध चिंतन में उनकी निरंतरता को रेखांकित किया. साथ ही भारत-जापान के बौद्धिक और सांस्कृतिक संबंधों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और समकालीन प्रासंगिकता पर भी विस्तार से चर्चा की. भारत सरकार की रन फॉर स्वदेशी पहल पर प्रकाश डालते हुए रामकृष्ण मिशन, राजगीर के स्वामी रामतत्वानंद महाराज ने स्वदेशी विचारधारा को आत्मनिर्भरता और नैतिक जीवन से जोड़ते हुए युवाओं से इसे अपनाने का आह्वान किया. कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉ बुद्धदेव भट्टाचार्य ने स्वागत करते हुए स्वामी विवेकानंद की सार्वभौमिक आध्यात्मिकता की अवधारणा और आज के युवाओं के नैतिक एवं बौद्धिक विकास में इसके महत्व पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम का संचालन प्रो सुशिम दुबे ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रमोद कुमार वेनवंशी ने किया.

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