बच्चों को बचपन से सिखाएं पैसे की अहमियत, गुल्लक से निवेश तक ऐसे बनाएं फाइनेंशियली स्मार्ट

क्या आपके बच्चे पैसों का महत्व नहीं समझते? गुल्लक से लेकर डिजिटल बैंकिंग तक, बच्चों को वित्तीय रूप से जिम्मेदार बनाने के आसान तरीके यहां जानें।

बिहारशरीफ. बदलती जीवनशैली ने केवल खान-पान और रहन-सहन ही नहीं, बल्कि परिवारों की आर्थिक आदतों को भी बदल दिया है. कभी घरों में बच्चों को गुल्लक देकर बचत की सीख दी जाती थी, लेकिन अब डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन शॉपिंग और तुरंत जरूरत पूरी करने की आदत ने बचत की संस्कृति को कमजोर कर दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को वित्तीय शिक्षा किताबों से नहीं, बल्कि रोजमर्रा के व्यवहार से मिलती है.

हर मांग तुरंत पूरी करना नहीं है सही

शहरवासी विकास कुमार उर्फ गांधी जी और बैंक कर्मी विजय कुमार के अनुसार, बच्चों की हर मांग तुरंत पूरी करने के बजाय उन्हें थोड़ा इंतजार करना सिखाना चाहिए. इससे वे समझते हैं कि हर चीज की कीमत होती है और उसे पाने के लिए धैर्य, योजना और मेहनत जरूरी है. यह आदत भविष्य में उन्हें पैसों का सही महत्व समझने में मदद करती है.

गुल्लक से शुरू होती है बचत की पहली सीख

विशेषज्ञों के अनुसार, पांच से आठ वर्ष की उम्र बच्चों को पैसों की पहचान कराने के लिए सबसे उपयुक्त होती है. इस दौरान उन्हें नोट और सिक्कों की जानकारी देने के साथ गुल्लक में नियमित बचत की आदत डालनी चाहिए. सप्ताह या महीने में थोड़ी-थोड़ी रकम जमा करने से बच्चों में बचत का संस्कार विकसित होता है. गुल्लक भरने पर बच्चों के साथ पैसे गिनना उन्हें बचत का महत्व समझाता है.

पॉकेट मनी से सीखते हैं बजट और जिम्मेदारी

नौ से 12 वर्ष की उम्र में बच्चों को सीमित पॉकेट मनी देकर खर्च और बचत का संतुलन सिखाया जा सकता है. जन्मदिन या त्योहार पर मिले पैसों का हिसाब रखना और उसका एक हिस्सा बचाने की आदत बच्चों में बजट बनाना, खर्च की प्राथमिकता तय करना और वित्तीय अनुशासन विकसित करती है.

किशोरावस्था में बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट की जानकारी दें

13 से 16 वर्ष की उम्र में बच्चों के नाम से माइनर बैंक खाता खुलवाकर उन्हें बैंकिंग, जमा-निकासी, यूपीआई और डिजिटल भुगतान की बुनियादी जानकारी दी जा सकती है. इसी समय उन्हें मेहनत, कमाई और जिम्मेदारी के संबंध को भी समझाना जरूरी है, ताकि वे पैसे की वास्तविक कीमत को समझ सकें.

17 वर्ष के बाद निवेश की बुनियादी समझ भी जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि 17 वर्ष की उम्र के बाद बच्चों को बचत के साथ-साथ निवेश की शुरुआती जानकारी भी दी जानी चाहिए. कंपाउंडिंग, म्यूचुअल फंड, एसआईपी और सरकारी बचत योजनाओं जैसी अवधारणाओं से परिचित कराने पर वे भविष्य में बेहतर वित्तीय निर्णय लेने में सक्षम बनते हैं.

विशेषज्ञ की सलाह

बैंक कर्मी विजय कुमार का कहना है कि पॉकेट मनी केवल खर्च करने के लिए पैसे देना नहीं, बल्कि बच्चों में वित्तीय अनुशासन विकसित करने का प्रभावी माध्यम है. यदि बचपन से सही वित्तीय संस्कार दिए जाएं, तो बच्चे बड़े होकर जिम्मेदार नागरिक, समझदार निवेशक और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं.


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By कंचन कुमार

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