Nalanda Success Story : नालंदा जिले के मोहद्दीपुर गांव निवासी संजीव कुमार ने बीआईटी सिंदरी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. अधिकांश युवाओं की तरह नौकरी की राह चुनने के बजाय उन्होंने खेती और कृषि आधारित उद्यमिता को अपना भविष्य बनाया. किसान परिवार से मिले अनुभव और तकनीकी शिक्षा ने उन्हें अलग सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.
2002 में शुरू हुआ मशरूम खेती का सफर
संजीव कुमार ने वर्ष 2002 में हिमाचल प्रदेश के सोलन से मशरूम उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण लिया. इसके बाद उन्होंने मशरूम की खेती शुरू की. उस समय बिहार में मशरूम उत्पादन और गुणवत्तापूर्ण स्पॉन को लेकर जागरूकता बेहद कम थी. इसके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से पीछे हटने के बजाय लगातार प्रयास जारी रखा.
छह वर्षों के संघर्ष के बाद मिली पहचान
वर्ष 2002 से 2008 तक का समय उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण रहा. आर्थिक परेशानियों के साथ लोगों का भरोसा जीतना भी आसान नहीं था. लगातार मेहनत, परिवार के सहयोग और वैज्ञानिक तरीके से काम करने के कारण धीरे-धीरे किसानों का विश्वास बढ़ा और उनका उद्यम सफल होता गया.
50 हजार से अधिक किसानों को दिया प्रशिक्षण
संजीव कुमार ने अपना कारोबार बढ़ाने के साथ-साथ किसानों और युवाओं को मशरूम उत्पादन से जोड़ने का अभियान भी शुरू किया. अब तक वह बिहार के विभिन्न जिलों में 50 हजार से अधिक महिला और पुरुष किसानों को मशरूम उत्पादन, स्पॉन चयन, तापमान प्रबंधन, रोग नियंत्रण और विपणन की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दे चुके हैं.
'साबरी स्पॉन लैब' बनी किसानों की ताकत
संजीव कुमार ने अपने गांव में आधुनिक तकनीक से लैस 'साबरी स्पॉन लैब' स्थापित की है. यहां ऑयस्टर, बटन और मिल्की मशरूम के लिए गुणवत्तापूर्ण स्पॉन तैयार किया जाता है. वर्तमान में लैब की उत्पादन क्षमता करीब 600 किलोग्राम प्रतिदिन है, जिसे बढ़ाकर 1000 किलोग्राम प्रतिदिन करने की योजना पर काम चल रहा है.
स्थानीय युवाओं और महिलाओं को मिल रहा रोजगार
लैब में वर्तमान समय में 10 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं. इसके अलावा आसपास के गांवों के लोगों को समय-समय पर रोजगार मिलता है. इस तरह यह उद्यम ग्रामीण रोजगार और स्वरोजगार का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है.
अब पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की तैयारी
संजीव कुमार अब स्पॉन उत्पादन के साथ बड़े पैमाने पर बटन मशरूम उत्पादन, मशरूम आधारित प्रोसेस्ड उत्पाद और जैविक खाद निर्माण की दिशा में काम कर रहे हैं. उनका मानना है कि गांव स्तर पर उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की मजबूत व्यवस्था बनने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है.
युवाओं को दिया सफलता का संदेश
संजीव कुमार का कहना है कि कृषि आधारित उद्योगों में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं. युवाओं को पहले तकनीकी प्रशिक्षण लेना चाहिए और छोटे स्तर से शुरुआत कर अनुभव के साथ कारोबार का विस्तार करना चाहिए. नई तकनीकों को अपनाना ही लंबे समय तक सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है.
