Nalanda DTO : बिहारशरीफ में चर्चित आय से अधिक संपत्ति मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है. बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने नालंदा के तत्कालीन जिला परिवहन पदाधिकारी अनिल कुमार दास को निलंबन से मुक्त कर दिया है. हालांकि राहत के बावजूद उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच और कार्रवाई फिलहाल जारी रहेगी. सरकार ने साफ कर दिया है कि जांच पूरी होने तक उन्हें किसी भी संवेदनशील या महत्वपूर्ण पद पर तैनात नहीं किया जाएगा.
यह पूरा मामला आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप से जुड़ा है, जिसकी जांच विशेष निगरानी इकाई पटना द्वारा की जा रही है. सरकार द्वारा जारी संकल्प के अनुसार एसवीयू की रिपोर्ट के आधार पर 6 मार्च 2025 को अनिल कुमार दास के खिलाफ केस दर्ज किया गया था. जांच में यह सामने आया कि वर्ष 2010 से लेकर अब तक के सेवा काल में उन्होंने करीब 94.90 लाख रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की है.
संपत्ति छुपाने का भी आरोप, नियमों के उल्लंघन की बात
जांच के दौरान यह भी आरोप लगा कि अनिल कुमार दास ने अपनी कई चल और अचल संपत्तियों के अर्जन और निस्तारण की जानकारी समय पर सरकार को नहीं दी. यह सरकारी सेवक आचरण नियमावली का सीधा उल्लंघन माना गया. इन्हीं गंभीर आरोपों के आधार पर मार्च 2025 में उन्हें निलंबित कर दिया गया था.
निलंबन के बाद विभागीय प्रक्रिया आगे बढ़ी और उनके खिलाफ आरोप-पत्र जारी किया गया. इसके जवाब में अनिल कुमार दास ने जून 2025 में अपना स्पष्टीकरण सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया. इसके बाद पूरे मामले की समीक्षा की गई.
समीक्षा समिति की सिफारिश पर मिली राहत
मामले की समीक्षा अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति ने की. 30 जून 2026 को हुई बैठक में समिति ने उन्हें निलंबन से मुक्त करने की अनुशंसा की. समिति की इस सिफारिश को अनुशासनिक प्राधिकार ने स्वीकार कर लिया और निलंबन समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया.
हालांकि सरकार ने इस आदेश के साथ यह भी स्पष्ट किया है कि विभागीय जांच अपने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी. अंतिम जांच प्रतिवेदन आने के बाद ही इस मामले में अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
वेतन और पोस्टिंग पर अभी निर्णय बाकी
सरकार ने यह भी साफ किया है कि निलंबन अवधि के दौरान मिलने वाले वेतन-भत्ते और सेवा के नियमितीकरण पर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. इस पर फैसला विभागीय कार्यवाही पूरी होने के बाद ही किया जाएगा.
साथ ही यह निर्देश भी जारी किया गया है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक अनिल कुमार दास की तैनाती किसी संवेदनशील पद पर नहीं की जाएगी, ताकि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो.
