राजगीर के डॉ. सुरेश कुमार को मिलेगा आईएआरए आउटस्टैंडिंग एकेडेमिशियन अवार्ड-2026, लंबे समय से बौद्ध अध्ययन में हैं सक्रिय

Dr. Suresh Kumar IARA Award : नव नालंदा महाविहार के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुरेश कुमार को 'आईएआरए आउटस्टैंडिंग एकेडेमिशियन अवार्ड-2026' के लिए चुना गया है. यह सम्मान उनके अकादमिक और शोध क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाएगा. उन्हें यह पुरस्कार मई 2027 में प्रदान किया जाएगा.

Dr. Suresh Kumar IARA Award : राजगीर के नव नालंदा महाविहार सम विश्वविद्यालय, नालंदा के सहायक प्राध्यापक डॉ. सुरेश कुमार को अकादमिक एवं शोध क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘आईएआरए आउटस्टैंडिंग एकेडेमिशियन अवार्ड-2026’ के लिए चयनित किया गया है. इंडियन एकेडमिक रिसर्चर्स एसोसिएशन, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु ने उनके चयन की घोषणा की है.

मई 2027 में प्रदान किया जाएगा सम्मान

एसोसिएशन के अनुसार डॉ. सुरेश कुमार को यह सम्मान मई 2027 में आयोजित वार्षिक पुरस्कार समारोह में प्रदान किया जाएगा. अवार्ड्स एंड रिकग्निशन कमेटी ने उनके अकादमिक रिकॉर्ड, शोध उपलब्धियों और इतिहास एवं मानविकी के क्षेत्र में योगदान का मूल्यांकन करने के बाद उनका चयन किया है.

बौद्ध अध्ययन में लंबे समय से सक्रिय

डॉ. सुरेश कुमार करीब 17 वर्षों से इंडियन सोसाइटी फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज से जुड़े हैं. वे देश में बौद्ध अध्ययन को अकादमिक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं. उनके शोध और अध्यापन में बौद्ध दर्शन एवं उससे जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेष ध्यान रहा है.

बौद्ध नैतिकता और पालि साहित्य प्रमुख शोध क्षेत्र

डॉ. कुमार के प्रमुख शोध क्षेत्रों में बौद्ध अध्ययन, बौद्ध नैतिकता, पालि साहित्य, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा बौद्ध विरासत एवं पर्यटन शामिल हैं. इन क्षेत्रों में उनकी अकादमिक गतिविधियों और शोध कार्यों को सम्मान के चयन का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है.

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भागीदारी

डॉ. सुरेश कुमार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और संगोष्ठियों में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे हैं. शोध, प्रकाशन और अकादमिक गतिविधियों के जरिए उन्होंने अपने विषयों पर लगातार काम किया है. उनकी शैक्षणिक गतिविधियों का दायरा इतिहास और मानविकी से जुड़े क्षेत्रों तक भी रहा है.

सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका

अकादमिक कार्यों के अलावा डॉ. कुमार सामाजिक क्षेत्र में भी लंबे समय से योगदान दे रहे हैं. वे ‘संघर्ष ए सिविक मूवमेंट फॉर जस्टिस, इक्वैलिटी, पीस, प्रॉस्पेरिटी एंड ब्रदरहुड’ के संस्थापक महासचिव हैं. उनके अनुसार संगठन के माध्यम से वे करीब 20 वर्षों से सामाजिक न्याय, समानता, शांति और भाईचारे से जुड़े मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं.

पहले भी कई सम्मान मिल चुके हैं

डॉ. सुरेश कुमार को इससे पहले भी विभिन्न क्षेत्रों में सम्मान मिल चुका है. उन्हें वर्ष 2021 में दधी महंता मेमोरियल सोशल साइंस रिसर्च नेशनल अवार्ड, 2013 में स्टूडेंट प्राइड अवार्ड और 2012 में बेस्ट पेपर अवार्ड प्राप्त हुआ है. जम्मू विश्वविद्यालय में भी उन्हें सांस्कृतिक, सामाजिक सेवा और एनएसएस गतिविधियों में योगदान के लिए सम्मानित किया जा चुका है.

चयन को शिक्षकों और विद्यार्थियों को समर्पित किया

पुरस्कार के लिए चयन पर डॉ. सुरेश कुमार ने इसे शिक्षकों, वरिष्ठ विद्वानों, सहकर्मियों और विद्यार्थियों के सहयोग का परिणाम बताया. उन्होंने कहा कि यह सम्मान बौद्ध अध्ययन और भारतीय ज्ञान परंपरा में शोध एवं अध्यापन को और अधिक प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने की प्रेरणा देगा.

नालंदा की अकादमिक पहचान को भी मिलेगा विस्तार

बौद्ध अध्ययन से जुड़े शोध और अकादमिक गतिविधियों के बीच डॉ. सुरेश कुमार का यह चयन नालंदा-राजगीर क्षेत्र के शैक्षणिक परिदृश्य के लिए भी महत्वपूर्ण है. नव नालंदा महाविहार जैसे संस्थान में बौद्ध अध्ययन और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में इस तरह की अकादमिक उपलब्धियां क्षेत्र की पहचान को मजबूत करती हैं.

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By रामविलास प्रसाद

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