नालंदा : सावन में भगवान शिव पर चढ़े बेलपत्र और फूलों से बनेगी जैविक खाद, राजगीर में शुरू हुआ अभियान

राजगीर के प्रज्ञा कृषक हित समूह ने सावन में शिव मंदिरों से फूल और बेलपत्र एकत्र कर जैविक खाद बनाने की अनूठी पहल शुरू की है। जानें पूरी खबर।

सावन में भगवान शिव को अर्पित होने वाले बेलपत्र, पुष्प व अन्य पूजा सामग्री अब कचरे के ढेर में नहीं जाएंगी. इसके तहत शिव मंदिरों से एकत्र होने वाली पवित्र पूजन सामग्री को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर जैविक खाद में बदला जाएगा.

फार्मर आफ दी ईयर अवार्ड से सम्मानित प्रज्ञा कृषक हित समूह तिलैया बड़हरी राजगीर के अध्यक्ष सह प्राकृतिक खेती के जिला निगरानी समिति के सदस्य अभिमन्यु सिंह ने बुधवार जानकारी देते हुए कहा कि शिवालयों का चढ़ावा (फूल बेलपत्र) कचरा में नहीं फेंके बल्कि हमें दे दें.

जो पत्ता शिव को अर्पित हुआ, वो कचरे में नहीं जाना चाहिए. अक्सर देखा जाता है कि मंदिरों में चढ़ाया गया फूल और बेलपत्र कचरा में फेंक दिया जाता है जो कि टोटली व्यर्थ है. अगर वही चढ़ाया गया फूल बेलपत्र कचरा में फेंकने के बजाय हमें दे दें.

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हमारी टीम बिहार शरीफ और राजगीर के मंदिरों से फूल बेलपत्र प्राप्त कर लेंगे. श्री सिंह ने बताया कि फूल बेलपत्र को अलग-अलग छांटकर धोकर प्राकृतिक खाद बनाया जायेगा. इससे पर्यावरण संरक्षण और संतुलन में मदद मिलेगी. मिट्टी पौधों और फसलों को भरपूर पोषण मिलेगा.

कनैल के फूल में कीटनाशी के गुण होते हैं. इसमें कार्डियक ग्लाइकोसाइड्स नामक विषैले रासायनिक तत्व पाए जाते हैं, जो सीधा दिल पर असर करती है. इससे मिट्टी में मौजूद दुश्मन कीटों का खात्मा करती है.

इसके फूल, पत्ते, छाल और बीज अत्यधिक जहरीले होते हैं. जहरीला होने के बावजूद इसके फूलों का उपयोग धार्मिक पूजा-पाठ और आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है.

30 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगा अभियान

समूह के कोषाध्यक्ष अमन वर्मा ने बताया कि सावन के सभी सोमवार और मंगलवार को विशेष संग्रह अभियान चलाया जाएगा. इसमें प्रमुख रूप से 3, 4 अगस्त, 10, 11 अगस्त, 17, 18 अगस्त और 24, 25 अगस्त को भी संग्रह किया जाएगा.

इसके अलावा 30 जुलाई से 28 अगस्त तक बिहार शरीफ और राजगीर के प्रमुख शिवालयों में शिव पर अर्पित पूजन सामग्री को कलेक्ट कर कंपोस्ट खाद तैयार की जाएगी.

कचरे में नहीं जाएगा शिव को अर्पित पूजन सामग्री

प्रज्ञा कृषक हित समूह के सचिव कुमार नरेंद्र देव ने बताया कि सावन में श्रद्धा को धरती की सेवा से जोड़ने का एक प्रयास मात्र है.

सावन के दौरान हर दिन हजारों श्रद्धालु शिवालयों में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं. इस दौरान बड़ी मात्रा में बेलपत्र, फूल और अन्य जैविक पूजन सामग्री भगवान शिव को अर्पित की जाती है.

अभी तक ये पवित्र पूजन सामग्री सामान्य कचरे में मिलकर डंपिंग यार्ड पहुंच जाता था. इससे न केवल श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत होती थीं, बल्कि जैविक खाद बनने की संभावनाएं भी खत्म हो जाती थीं.

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By Ramvilas prasad

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