Nalanda News : नालंदा जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र के नेपुरा-बैरोटी गांव में दो दलित परिवारों को कथित तौर पर गांव छोड़ने का फरमान दिए जाने का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) किशल्य श्रीवास्तव ने तत्काल जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया है.
जमीन विवाद के बीच सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार, नेपुरा-बैरोटी गांव स्थित उच्च विद्यालय परिसर में भवन निर्माण कार्य चल रहा था. इसी दौरान विद्यालय से सटी निजी जमीन के मालिक ने निर्माण कार्य पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन को आवेदन दिया था. इसके बाद शुक्रवार देर रात गांव में स्थानीय सरपंच की अध्यक्षता में एक बैठक बुलाई गई.
दलित परिवारों पर जमीन देने का दबाव लगाने का आरोप
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि बैठक में उन्हें विद्यालय भवन विस्तार के लिए अपनी निजी जमीन देने का दबाव बनाया गया. उन्होंने जब जमीन देने से इनकार किया तो शनिवार को हुई दूसरी बैठक में कथित तौर पर दो महीने के भीतर गांव छोड़ने का फरमान सुना दिया गया.
'शिकायत की तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे'
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि उन्हें चेतावनी दी गई कि तय समय में घर खाली नहीं करने पर उनका सामान बाहर फेंक दिया जाएगा. साथ ही प्रशासन या पुलिस से शिकायत करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई. घटना के बाद दोनों परिवार भय और दहशत के माहौल में हैं.
एसडीओ ने दिए तत्काल जांच के आदेश
मामले की सूचना मिलते ही एसडीओ किशल्य श्रीवास्तव ने बिहारशरीफ अंचलाधिकारी लखेंद्र कुमार और दीपनगर थानाध्यक्ष सुमन कुमार को गांव भेजकर पूरे मामले की जांच कराने तथा दोषियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.
प्रशासन बोला- दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
एसडीओ ने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विधिसम्मत और कड़ी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने या किसी परिवार को धमकाकर गांव छोड़ने के लिए मजबूर करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. फिलहाल गांव में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं.
