Nalanda University CSIR MoU : नालंदा विश्वविद्यालय और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के बीच बुधवार को नई दिल्ली के सीएसआईआर मुख्यालय (अनुसंधान भवन) में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया. यह साझेदारी विज्ञान आधारित सतत विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, ग्रामीण परिवर्तन, कौशल विकास और वैज्ञानिक जनजागरूकता को नई दिशा देगी.
इसका उद्देश्य सीएसआईआर की स्वदेशी वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपलब्धियों को नालंदा विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक वातावरण से जोड़कर समाज-केंद्रित विकास का ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिसे देश-विदेश में अपनाया जा सके.
एमओयू का आदान-प्रदान नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने विदेश मंत्रालय के सचिव (ईस्ट) रुद्रेन्द्र टंडन की उपस्थिति में किया. समारोह में दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और संकाय सदस्य भी मौजूद रहे.
समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तकनीक का लाभ: प्रो. सचिन चतुर्वेदी
इस अवसर पर कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि नई प्रौद्योगिकियों का विकास तभी सार्थक है, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे. उन्होंने कहा कि सीएसआईआर के साथ यह सहयोग नालंदा क्षेत्र में सतत विकास को गति देगा. इसके तहत आदर्श ग्राम विकास, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जल गुणवत्ता सुधार, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के साथ विश्वविद्यालय की सहभागिता को और सशक्त बनाया जाएगा.
अंतरराष्ट्रीय शिक्षण और अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा: रुद्रेन्द्र टंडन
इस अवसर पर विदेश मंत्रालय के सचिव (ईस्ट) रुद्रेन्द्र टंडन ने कहा कि प्रधानमंत्री की परिकल्पना के अनुरूप नालंदा विश्वविद्यालय को विश्वस्तरीय अंतरराष्ट्रीय शिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि देश के अग्रणी वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान सीएसआईआर के साथ यह सहयोग विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आसपास के समुदायों के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगा. यह वैज्ञानिक नवाचारों का लाभ समाज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
वैश्विक स्तर पर पहुंचेगी भारत की वैज्ञानिक उपलब्धि: डॉ. एन. कलैसेल्वी
सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने इसे दोनों संस्थानों के लिए ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का बहुराष्ट्रीय छात्र समुदाय भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का प्रभावी मंच बनेगा. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक नवाचारों को समाज तक पहुंचाने में सामाजिक विज्ञान की भी महत्वपूर्ण भूमिका है.
उन्होंने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, मृदा सुधार, जल गुणवत्ता सुधार और सामाजिक उपयोगिता से जुड़ी सीएसआईआर की कई मिशन आधारित तकनीकों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हें नालंदा विश्वविद्यालय परिसर और आसपास के गांवों में लागू किया जाएगा. प्रारंभिक चरण में कम से कम तीन प्रमुख सामाजिक मिशनों को क्रियान्वित करने का प्रस्ताव भी रखा गया.
विश्वविद्यालय परिसर में बनेगी सीएसआईआर टेक्नोलॉजी गैलरी
समझौते के तहत नालंदा विश्वविद्यालय परिसर में सीएसआईआर टेक्नोलॉजी गैलरी की स्थापना की जाएगी. इसमें सीएसआईआर की विभिन्न प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीकों, वैज्ञानिक नवाचारों और प्रायोगिक मॉडलों का प्रदर्शन होगा. यह गैलरी विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, अंतरराष्ट्रीय विद्वानों और आगंतुकों को भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों से परिचित कराने का प्रमुख केंद्र बनेगी.
गांवों में कौशल विकास और आजीविका संवर्धन कार्यक्रम
एमओयू के अंतर्गत कृषि अवशेष एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों के उपयोग के साथ राजगीर क्षेत्र में विश्वविद्यालय की "सहभागिता संवाद" पहल के तहत गांवों में कौशल विकास और आजीविका संवर्धन कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे.
इनमें पुष्पोत्पादन, औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती, कृषि प्रसंस्करण, ग्रामीण उद्यमिता तथा अन्य मिशन आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देकर स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जाएगा. यह साझेदारी वैज्ञानिक अनुसंधान को समाज के विकास से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
