Biharsharif Sadar Hospital Ruckus : सदर अस्पताल में तीन वर्षीय बच्चे की इलाज के दौरान मौत के बाद जमकर बवाल हुआ. आक्रोशित परिजनों और उनके समर्थकों ने अस्पताल के आईसीयू, इमरजेंसी और एसएनसीयू वार्ड में घुसकर कथित तौर पर तोड़फोड़ की.
ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों को जान से मारने के लिए दौड़ाने और मारपीट करने के साथ महिला स्वास्थ्यकर्मियों से गाली-गलौज और बदसलूकी का भी आरोप है. घटना के विरोध में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने कार्य बहिष्कार कर दिया, जिसके कारण अस्पताल की कई महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो गईं.
डायरिया और सांस लेने में परेशानी के बाद लाया गया था मासूम
मामला सोहसराय थाना क्षेत्र के छोटी पहाड़ी निवासी गुड्डू राम के तीन वर्षीय पुत्र गौरव कुमार की मौत से जुड़ा है. स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार बच्चे को रात करीब 11 से 12 बजे के बीच गंभीर डायरिया और गैस्पिंग यानी सांस लेने में भारी परेशानी की स्थिति में सदर अस्पताल लाया गया था.
अस्पताल कर्मियों का दावा है कि बच्चे को तत्काल प्राथमिक उपचार दिया गया और आईवी सलाइन चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन उसकी हालत बेहद गंभीर थी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. बच्चे की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा भड़क गया और देखते ही देखते अस्पताल परिसर में स्थिति हिंसक हो गई.
स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक डॉक्टरों को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा. अस्पताल की संपत्ति, उपकरण और फर्नीचर को भी नुकसान पहुंचाए जाने का आरोप है.
परिजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही का गंभीर आरोप
वहीं, मृतक बच्चे के चाचा शंकर कुमार समेत अन्य परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि बच्चे को दोपहर से उल्टी और पतले दस्त की शिकायत थी. रात करीब 11 बजे अचानक उसकी हालत बिगड़ने के बाद परिजन उसे लेकर सदर अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे.
परिजनों का आरोप है कि वहां तत्काल इलाज शुरू करने के बजाय पहले पर्ची कटवाने को कहा गया. परिजनों के मुताबिक बच्चे की मां उसे गोद में लेकर मदद की गुहार लगाती रही. आरोप है कि डॉक्टर के आने में देरी हुई और बाद में बच्चे को शिशु वार्ड भेज दिया गया, जहां पर्याप्त चिकित्सकीय व्यवस्था नहीं होने का आरोप लगाया गया.
परिजनों का दावा है कि बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही और बाद में उसे आईसीयू में ले जाकर ऑक्सीजन दी गई, लेकिन कुछ ही देर में बच्चे की मौत हो गई.
लापरवाही के आरोपों को अस्पताल प्रशासन ने किया खारिज
हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. सदर अस्पताल के उपाधीक्षक सह प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि बच्चा कई दिनों से बीमार था और घर पर ही उसका इलाज चल रहा था.
अस्पताल पहुंचने के समय उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी. डॉ. राजीव रंजन ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि अस्पताल में तैनात होमगार्ड और निजी सुरक्षाकर्मी स्थिति को नियंत्रित करने में प्रभावी भूमिका नहीं निभा सके.
सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और डॉक्टरों पर हमला करने के मामले में गैर-जमानती धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराने की बात कही गई है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को हिरासत में लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है.
स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल से भटकते रहे मरीज
इधर, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के कार्य बहिष्कार का सीधा असर मरीजों पर पड़ा. पर्ची काउंटर बंद रहने से दूर-दराज से आए मरीज इलाज के लिए परेशान होते रहे.
बमरौली से बुखार से पीड़ित परिजन को लेकर पहुंचे प्रमोद कुमार पांडेय ने बताया कि वह सुबह से इलाज के लिए भटकते रहे. सड़क दुर्घटना में घायल वसीम को भी परिजन इलाज के लिए इमरजेंसी लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टर नहीं मिलने पर उसे निजी अस्पताल ले जाना पड़ा.
अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों ने भी डॉक्टरों के नहीं पहुंचने की शिकायत की. फिलहाल स्वास्थ्यकर्मी सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था और सभी उपद्रवियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हैं.
स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल से भटकते रहे मरीज
इधर, डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के कार्य बहिष्कार का सीधा असर मरीजों पर पड़ा. पर्ची काउंटर बंद रहने से दूर-दराज से आए मरीज इलाज के लिए परेशान होते रहे.
बमरौली से बुखार से पीड़ित परिजन को लेकर पहुंचे प्रमोद कुमार पांडेय ने बताया कि वह सुबह से इलाज के लिए भटकते रहे. सड़क दुर्घटना में घायल वसीम को भी परिजन इलाज के लिए इमरजेंसी लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टर नहीं मिलने पर उसे निजी अस्पताल ले जाना पड़ा.
अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों ने भी डॉक्टरों के नहीं पहुंचने की शिकायत की. फिलहाल स्वास्थ्यकर्मी सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था और सभी उपद्रवियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हैं.
