बिहारशरीफ से कंचन कुमार की रिपोर्ट
Bihar Sharif News : नालंदा जिले में खरीफ खेती का सबसे महत्वपूर्ण दौर शुरू हो चुका है, लेकिन खेतों में पानी की भारी कमी किसानों की चिंता बढ़ा रही है. रोहिणी नक्षत्र समाप्त हुए एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी जिले के अधिकांश क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है. नदी, तालाब, पोखर, पइन और आहर सूखे पड़े हैं, जबकि कई इलाकों में भू-जल स्तर 35 फीट से नीचे पहुंच गया है. ऐसे हालात में किसान किसी तरह पटवन कर धान के बिचड़े की बुआई कर रहे हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार रोहिणी नक्षत्र में धान के बिचड़े की बुआई सबसे उपयुक्त मानी जाती है, लेकिन इस बार मौसम की बेरुखी और सिंचाई संसाधनों की बदहाली ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. जिले में इस वर्ष एक लाख 53 हजार 327 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन पानी के अभाव में खेती की रफ्तार प्रभावित होने लगी है.
155 राजकीय नलकूप बंद, किसानों के सामने सिंचाई संकट
जिले में वर्तमान समय में कुल 355 राजकीय नलकूप हैं, जिनके माध्यम से खेतों की सिंचाई की जानी है. इनमें से 155 नलकूप बंद पड़े हैं, जबकि केवल 200 नलकूप ही किसी तरह संचालित हो रहे हैं. परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में किसानों को समय पर पटवन नहीं मिल पा रहा है. धान की बिचड़ा बुआई और रोपनी के लिए यह समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. लेकिन नलकूपों के बंद रहने से किसानों को निजी बोरिंग और डीजल पंप पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत भी बढ़ रही है.
पांच वर्षों में बदली तस्वीर, 40 नलकूप चालू तो 48 हुए अनुपयोगी
विभागीय आंकड़ों के अनुसार पांच वर्ष पहले जिले में कुल 417 राजकीय नलकूप दर्ज थे. उस समय 302 नलकूप बंद अवस्था में थे. बीते पांच वर्षों में विभागीय प्रयासों से 40 बंद नलकूपों को चालू कराया गया, लेकिन दूसरी ओर 48 नलकूप पूरी तरह जर्जर और अनुपयोगी घोषित कर दिए गए. फिलहाल जिले में 355 छोटे और बड़े राजकीय नलकूप ही उपयोग योग्य श्रेणी में हैं. इनमें छोटे नलकूप से औसतन 10 हेक्टेयर तथा बड़े नलकूप से 20 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई की जा सकती है. विभाग का कहना है कि 48 नलकूप इतने पुराने और खराब हो चुके हैं कि उनकी मरम्मत के बाद भी संचालन संभव नहीं है.
नाबार्ड के 85 नलकूप भी बंद
सिंचाई व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नाबार्ड योजना के तहत स्थापित 185 नलकूपों में भी केवल 100 से ही खेतों की सिंचाई हो रही है. शेष 85 नलकूप तकनीकी खराबी और बिजली आपूर्ति की समस्या के कारण बंद पड़े हैं. किसानों का कहना है कि यदि इन नलकूपों को समय पर चालू करा दिया जाए तो जिले के हजारों एकड़ खेतों में सिंचाई की समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है.
पंचायतों से वापस ली जाएगी नलकूपों की जिम्मेदारी
करीब पांच वर्ष पहले सरकार ने राजकीय नलकूपों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी पंचायत स्तरीय समितियों को सौंप दी थी. मुखिया और पंचायत सचिवों को नलकूप संचालन, ऑपरेटर नियुक्ति, पटवन शुल्क वसूली और बिजली बिल भुगतान की जिम्मेदारी दी गई थी. जबकि तकनीकी समस्याओं के समाधान और निगरानी का कार्य लघु जल संसाधन विभाग को सौंपा गया था. लेकिन अधिकांश पंचायतों में नलकूपों का संचालन अपेक्षित स्तर पर नहीं हो सका. कई जगहों पर समितियों की उदासीनता के कारण नलकूप वर्षों तक बंद पड़े रहे. अब राज्य सरकार ने इस व्यवस्था की समीक्षा के बाद राजकीय नलकूपों की जिम्मेदारी पुनः जल संसाधन विभाग को सौंपने का निर्णय लिया है. मंत्रिमंडल से इसे मंजूरी मिल चुकी है और विभागीय स्तर पर इसकी तैयारी भी शुरू कर दी गई है.
करोड़ों रुपये खर्च, फिर भी भगवान भरोसे खेती
किसानों का आरोप है कि सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन धरातल पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है. कई गांवों में मामूली तकनीकी खराबी के कारण नलकूप महीनों से बंद पड़े हैं. गत वर्ष दस नलकूपों को चालू कराने के लिए टेंडर जारी किए गए थे और पहली किश्त के रूप में पांच-पांच लाख रुपये भी उपलब्ध कराए गए थे. इसके बावजूद अधिकांश क्षेत्रों में सिंचाई संकट बरकरार है. किसानों का कहना है कि यदि समय पर मरम्मत और निगरानी की जाती तो आज उन्हें पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता.
सात लाख से अधिक परिवारों की आजीविका खेती पर निर्भर
नालंदा जिले में एक लाख 91 हजार 90 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है. इसी कृषि भूमि पर करीब 7 लाख 3 हजार 450 परिवारों की आजीविका निर्भर करती है. इनमें 3 लाख 23 हजार 324 कृषक परिवार और 3 लाख 80 हजार 126 कृषक मजदूर परिवार शामिल हैं. धान जिले की प्रमुख फसल है और अधिकांश ग्रामीण परिवारों की आय का मुख्य स्रोत भी. ऐसे में सिंचाई व्यवस्था की बदहाली सीधे लाखों लोगों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है.
क्या कहते हैं अधिकारी
लघु जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता अभिषेक कुमार ने बताया कि राजकीय नलकूपों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी पंचायत स्तरीय समितियों से वापस लेने की प्रक्रिया चल रही है. इसके लिए सरकार से आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त हो चुके हैं. उन्होंने कहा कि खरीफ खेती को देखते हुए जिले के सभी 355 राजकीय नलकूपों का सर्वेक्षण कराया जा रहा है. तकनीकी समस्याओं को दूर करने और बंद नलकूपों को चालू कराने के लिए विभागीय टीमों को क्षेत्र भ्रमण का निर्देश दिया गया है.
किसानों ने उठाए सवाल
किसान अनुज कुशवाहा, रामजी महतो और अन्य किसानों का कहना है कि धान की बिचड़ा बुआई और रोपनी के सबसे महत्वपूर्ण समय में 155 नलकूपों का बंद रहना प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है. किसानों का कहना है कि एक ओर वे बारिश की आस लगाए बैठे हैं, दूसरी ओर सरकारी सिंचाई व्यवस्था जवाब दे चुकी है. यदि जल्द ही बंद नलकूपों को चालू नहीं कराया गया और पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो खरीफ सीजन की खेती पर गंभीर असर पड़ सकता है. इसका सीधा नुकसान किसानों की आमदनी और जिले के कृषि उत्पादन दोनों पर पड़ेगा.
