Arhar Farming Training in Nalanda : कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (आत्मा), नालंदा द्वारा आत्मा सभागार, बिहारशरीफ में दलहन की वैज्ञानिक खेती विषय पर एक दिवसीय जिलास्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया. प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को दलहन, विशेषकर अरहर (तूर) की वैज्ञानिक खेती की नवीनतम तकनीकों से अवगत कराकर उत्पादन और आय में वृद्धि करना था.
प्रखंडों से पहुंचे प्रगतिशील किसान और योजनाओं की जानकारी
कार्यक्रम में जिले के सभी 20 प्रखंडों से लगभग 150 प्रगतिशील किसान शामिल हुए. साथ ही सभी प्रखंडों के बीटीएम, एटीएम एवं आत्मा नालंदा की प्रीति कुमारी सहित कृषि विभाग के पदाधिकारी और कर्मी भी उपस्थित रहे.
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए उप परियोजना निदेशक धनंजय कुमार सिंह ने कहा कि जिले में दलहन फसलों के क्षेत्र विस्तार और उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक खेती अपनाना जरूरी है. उन्होंने किसानों से सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया.
वैज्ञानिकों द्वारा अरहर की उन्नत तकनीकों की जानकारी
मुख्य वक्ता केभीके हरनौत के वैज्ञानिक उमेश नारायण उमेश ने अरहर की वैज्ञानिक खेती पर विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि जल निकास वाली दोमट या बलुई दोमट भूमि अरहर के लिए सबसे अच्छी होती है.
किसानों को उन्होंने खेत की 2-3 बार जुताई कर भुरभुरी भूमि तैयार करने, प्रमाणित बीज का राइजोबियम एवं पीएसबी कल्चर से बीजोपचार करने, अनुशंसित दूरी पर कतारों में बुवाई करने, मिट्टी जांच के आधार पर सल्फर व सूक्ष्म पोषक तत्व देने, समय पर खरपतवार नियंत्रण और जल निकासी करने, आइपीएम अपनाकर फली छेदक जैसे कीटों पर नियंत्रण करने, समय पर कटाई और उचित भंडारण से गुणवत्ता बचाने जैसी कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं.
प्रसंस्करण से आय बढ़ाने और दाल मिल की जानकारी
सहायक निदेशक, कृषि अभियंत्रण ने दाल मिल, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि प्रसंस्करण के जरिए किसान अपनी आय में अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकते हैं.
कार्यक्रम के अंत में विशेषज्ञों ने किसानों की शंकाओं का समाधान किया. किसानों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए ऐसे कार्यक्रम लगातार कराने की मांग की.
