Bihar Village Tax: बिहार के अब गांवों में भी कई सेवाओं और गतिविधियों पर टैक्स और शुल्क देना पड़ेगा. बिहार सरकार ने पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए फैसला लेते हुए ग्राम पंचायतों में कई तरह के कर, शुल्क और फीस की अधिकतम दरों को मंजूरी दे दी है. सरकार का कहना है कि इससे पंचायतें आत्मनिर्भर बनेंगी और विकास कार्यों के लिए उन्हें अतिरिक्त संसाधन मिल सकेंगे.
घरों पर कितना लिया जाएगा टैक्स?
नई व्यवस्था के तहत पंचायत क्षेत्र में पक्के मकान पर सालाना अधिकतम 100 रुपये और आधे पक्के मकान पर 50 रुपये होल्डिंग टैक्स लिया जा सकेगा. मिट्टी के मकानों को इस कर से छूट दी गई है यानी कि उनसे कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा. लेकिन प्रधानमंत्री आवास और इंदिरा आवास योजना के लाभार्थियों के लिए 25 रुपये का वार्षिक कर तय किया गया है, जिसका भुगतान संबंधित विभाग करेगा.
बाजार-हाट समेत इनसे भी लिये जायेंगे टैक्स
जानकारी के मुताबिक, सिर्फ मकान ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी शुल्क लगाया जाएगा. होटल, विवाह भवन, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, सिनेमा हॉल और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से सालाना 100 रुपये से लेकर 5 हजार रुपये तक कर लिया जा सकेगा. हाट-बाजार, मेले, बस पड़ाव, टेंपो स्टैंड, दुकानों और पशु मेलों पर भी निर्धारित शुल्क लागू होगा.
इसके अलावा पेयजल आपूर्ति, कचरा उठाव और सार्वजनिक शौचालय जैसी सुविधाओं के लिए भी पंचायतें शुल्क वसूल सकेंगी. गांवों में होल्डिंग टैक्स को लेकर बुधवार को हुई बैठक में मंजूरी मिली थी. सरकार ने ग्राम पंचायत कर, दर और शुल्क नियमावली-2026 को मंजूर किया गया था.
क्या कहना है पंचायती राज मंत्री का?
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मुताबिक, टैक्स के जरिए जो राशि ली जाएगी, उससे पंचायतों का ही विकास होगा. पंचायतें आत्मनिर्भर बनेंगी. इसके साथ ही संस्थाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए कर की दरों का निर्धारण किया गया है. दूसरी तरफ, इससे पहले मंत्री दीपक प्रकाश ने गांवों में होल्डिंग टैक्स का विरोध किया था.
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