Bihar Urban Transformation: बिहार के पांच शहरों की सूरत आने वाले दस वर्षों में पूरी तरह बदलने वाली है. राजधानी पटना के साथ गयाजी, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और पूर्णिया को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की बड़ी तैयारी शुरू हो चुकी है. राज्य सरकार ने इन शहरों के सुनियोजित विकास के लिए करीब 4751 करोड़ रुपये खर्च करने की रूपरेखा तैयार की है. इस योजना के तहत शहरों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा ताकि बढ़ती आबादी के साथ बेहतर शहरी जीवन उपलब्ध कराया जा सके.
2027 से 2037 तक होगा काम
राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस योजना पर तैयारी शुरू कर दी है. योजना के अनुसार 2027 से 2037 तक यानी पूरे दस साल में अलग-अलग चरणों में 4751 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इस दौरान पांच बड़े शहरों में सड़क, जलनिकासी, यातायात, आवास और दूसरी जरूरी शहरी सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा.
इस बड़े शहरी परिवर्तन कार्यक्रम के लिए करीब 500 मिलियन डॉलर की सहायता का उपयोग किया जाएगा. सरकार का फोकस सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अन्य शहरों के विकास के लिए भी अलग स्तर पर काम किया जाएगा. इस योजना का मकसद बिहार के शहरों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार करना है.
बढ़ती आबादी के हिसाब से तैयार हो रहा मास्टर प्लान
बिहार में तेजी से बढ़ रही शहरी आबादी को देखते हुए सरकार अब बिना योजना वाले विस्तार की जगह मास्टर प्लान आधारित विकास मॉडल पर काम कर रही है. शहरों में बढ़ती ट्रैफिक, आवास, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं की मांग को ध्यान में रखते हुए यह योजना तैयार की गई है. सरकार चाहती है कि आने वाले समय में ये शहर सिर्फ आबादी का केंद्र न बनें, बल्कि बेहतर सुविधाओं और रोजगार के बड़े हब के रूप में विकसित हों.
इस परियोजना को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार वर्ल्ड बैंक के साथ मिलकर बिहार अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम शुरू करेगी. इसके लिए केंद्र सरकार की सहमति के बाद विश्व बैंक के साथ एमओयू किया जाएगा. यह कार्यक्रम अगले दस वर्षों तक चलेगा और शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा.
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रोजगार, कारोबार और सुविधाओं का नया दौर
सरकार का मानना है कि इस योजना से पांचों शहरों में न सिर्फ बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, बल्कि बाजार, व्यापार और रोजगार के नए मौके भी बनेंगे. बेहतर सड़कें, आधुनिक सुविधाएं और फेजवाइज विकास से बिहार के प्रमुख शहरों की पहचान नए रूप में सामने आ सकती है. आने वाले वर्षों में यह योजना बिहार के शहरी विकास की दिशा बदलने वाली बड़ी पहल मानी जा रही है.
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