Bihar University New Rule: बिहार के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों (VC) के वित्तीय अधिकारों को सीमित कर दिया गया है. अब कुलपति अपनी मर्जी से वित्तीय नीति या बड़े वित्तीय फैसले नहीं ले सकेंगे. महत्वपूर्ण वित्तीय मामलों में उन्हें चांसलर की अनुमति लेनी होगी.
इस संबंध में लोकभवन के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह की ओर से पत्र जारी किया गया है. यह आदेश चांसलर जनरल सैयद अता हसनैन के निर्देश पर जारी किया गया है.
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बड़े वित्तीय फैसलों के लिए चांसलर की मंजूरी जरूरी
नए निर्देश के मुताबिक, विश्वविद्यालयों के कुलपति अपने स्तर से वित्तीय नीति और वित्तीय मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय नहीं ले सकेंगे. ऐसे मामलों में पहले चांसलर की अनुमति लेनी होगी.
यानी विश्वविद्यालय में कोई बड़ा वित्तीय फैसला लेना है, तो VC को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा. चांसलर की मंजूरी के बाद ही ऐसे मामलों में आगे बढ़ा जा सकेगा.
इस बदलाव से विश्वविद्यालयों में वित्तीय फैसले लेने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक नियंत्रित होगी. महत्वपूर्ण वित्तीय मामलों में कुलपतियों की स्वतंत्र भूमिका सीमित हो गई है.
रोजमर्रा के खर्च कर सकेंगे VC
हालांकि, कुलपतियों के रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज पर इसका असर नहीं पड़ेगा. उन्हें सामान्य और जरूरी खर्च करने का अधिकार रहेगा.
विश्वविद्यालय की नियमित गतिविधियों के लिए होने वाले छोटे-मोटे खर्च VC पहले की तरह कर सकेंगे. लेकिन वित्तीय नीति से जुड़े फैसले इस अधिकार के दायरे में नहीं होंगे.
बड़े वित्तीय फैसलों या ऐसे मामलों में जिनका विश्वविद्यालय के वित्तीय प्रबंधन पर व्यापक असर पड़ता है, चांसलर की अनुमति जरूरी होगी.
नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश
चांसलर जनरल सैयद अता हसनैन ने विश्वविद्यालयों को नए निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है. लोकभवन की ओर से जारी पत्र के जरिए संबंधित अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई है.
