बिहार के चीनी मिलों को राहत, गन्ने की खोई से बिजली बनाने के नियम बदले, इन्हें मिलेगा फायदा

Bihar Sugar Mills Power Generation: बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने बगास से बिजली उत्पादन के नियमों में बदलाव किया है. अब 2 मेगावाट तक के छोटे प्लांट भी बिजली बना सकेंगे. बिजली खरीद समझौता 15 से घटाकर 5 साल और सालाना सप्लाई लक्ष्य 53 से घटाकर 25 प्रतिशत किया गया है.

Bihar Sugar Mills Power Generation: बिहार में अब गन्ने की खोई से बिजली बनाना छोटे प्लांटों के लिए भी आसान होगा. बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने बगास यानी गन्ने की खोई से बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब 5 मेगावाट की जगह 2 मेगावाट तक के छोटे बिजली संयंत्र भी इस व्यवस्था का हिस्सा बन सकेंगे. यानी छोटी चीनी मिलों और प्लांट संचालकों के लिए बिजली उत्पादन का रास्ता खुल गया है.

15 साल का समझौता अब सिर्फ 5 साल

बगास से बनने वाली बिजली की खरीद के लिए पहले 15 साल का बिजली खरीद समझौता (PPA) होता था. अब इसकी अवधि घटाकर 5 साल कर दी गई है. आयोग का मानना है कि बगास की कीमत और बिजली उत्पादन की लागत समय के साथ बदलती रहती है. छोटे समय के समझौते से उत्पादक बदलती परिस्थितियों के हिसाब से बेहतर दरों पर बिजली उपलब्ध करा सकेंगे.

53% की जगह अब 25% बिजली देनी होगी

सबसे अहम बदलाव सालाना बिजली आपूर्ति के लक्ष्य में किया गया है. पहले प्लांट को अपनी कुल क्षमता की कम से कम 53 प्रतिशत बिजली सालभर में सप्लाई करनी होती थी. लेकिन गन्ने की पेराई अक्टूबर से फरवरी के बीच ही मुख्य रूप से होती है. ऐसे में पूरे साल समान उत्पादन करना मुश्किल था. अब न्यूनतम सालाना सप्लाई का लक्ष्य 25 प्रतिशत कर दिया गया है. लेकिन लक्ष्य पूरा नहीं करने पर बची हुई बिजली की कमी पर निर्धारित दर का आधा जुर्माना देना होगा.

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एक मिल, एक बोली की बाध्यता खत्म

अब अगर किसी कंपनी के पास एक से ज्यादा चीनी मिलें या बिजली प्लांट हैं, तो वह हर मिल के लिए अलग-अलग बोली लगा सकेगी. इससे ज्यादा कंपनियों के टेंडर में शामिल होने की उम्मीद है. प्रतिस्पर्धा बढ़ने पर सरकारी बिजली वितरण कंपनियों को कम दर पर बिजली मिल सकती है. आयोग के इस फैसले से साउथ बिहार और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए बगास से बनने वाली 100 मेगावाट बिजली खरीदना आसान होगा.

इतना ही नहीं, उत्पादित बिजली सीधे ट्रांसमिशन ग्रिड में जाएगी. फिलहाल बिहार की 8 चीनी मिलों से 120–130 मेगावाट बगास आधारित बिजली उत्पादन की क्षमता है. सीजन के दौरान इनमें से करीब 50–70 मेगावाट बिजली रोजाना ग्रिड को मिलती है. यानी नई व्यवस्था सिर्फ चीनी मिलों के लिए नहीं, बल्कि बिहार के बिजली उपभोक्ताओं के लिए भी अहम है.

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