Success Story: बिहार के युवाओं में प्रतिभा और संघर्ष की कमी नहीं है. इसका ताजा उदाहरण वैशाली जिले के जंदाहा बाजार में देखने को मिला है. यहां एक साधारण परिवार के बेटे धर्मेंद्र कुमार ने अपनी मेहनत से बड़ी कामयाबी हासिल की है. धर्मेंद्र ने BPSC की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा पास कर राजस्व अधिकारी का पद हासिल किया है. उनकी सफलता के पीछे मां की वर्षों की मेहनत और संघर्ष की कहानी है.
मां ने 20-25 साल धोए पुलिसकर्मियों के कपड़े
धर्मेंद्र कुमार के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी. उनके पिता मेहनत-मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाते हैं. वहीं मां रेखा देवी पिछले 20-25 वर्षों से जंदाहा थाने के पुलिसकर्मियों के कपड़े धोने का काम कर रही हैं.
मां ने दिन-रात मेहनत की. जो कुछ कमाया, उसे बेटे की पढ़ाई में लगा दिया. हालात मुश्किल थे, लेकिन बेटे की पढ़ाई नहीं रुकी. धर्मेंद्र ने भी मां के संघर्ष को अपनी ताकत बनाया और लगातार मेहनत करते रहे.
मां की आंखों में छलके खुशी के आंसू
बेटे के राजस्व अधिकारी बनने की खबर ने रेखा देवी को भावुक कर दिया. उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे. उन्होंने बताया कि जंदाहा थाने के पुलिसकर्मियों ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया. जरूरत के समय हरसंभव मदद भी की.
रेखा देवी सालों से थाने के पुलिस स्टाफ के कपड़े धोती आ रही हैं. अब उसी थाने के पुलिसकर्मियों के सामने उनके बेटे की सफलता का सम्मान हुआ. उनके लिए यह पल किसी सपने के सच होने जैसा था.
थाने में बुलाकर हुआ सम्मान
धर्मेंद्र की सफलता से जंदाहा क्षेत्र के सभी लोग खुश हैं. जहां उनकी मां कपड़े धोती थीं. उसी थाने में उनके बेटे को सम्मानित किया गया.
पुलिस अधिकारियों ने धर्मेंद्र को फूल-माला पहनाकर सम्मानित किया. उन्हें मिठाई खिलाकर सफलता की बधाई दी गई. अधिकारियों ने कहा कि धर्मेंद्र की कामयाबी उनके परिवार के साथ पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा है.
गांव में निकला जुलूस, ढोल-नगाड़ों के साथ मना जश्न
जब धर्मेंद्र ने सफलता हासिल की थी. तब स्थानीय ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकाला था. लोगों ने धर्मेंद्र और उनके परिवार को बधाई भी दी.
एक ऐसा परिवार, जिसने वर्षों तक आर्थिक तंगी का सामना किया. उसी परिवार के बेटे ने अब सरकारी अधिकारी बनकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है.
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खाकी वर्दी पहनना चाहते हैं धर्मेंद्र
राजस्व अधिकारी बनने के बाद भी धर्मेंद्र कुमार रुकना नहीं चाहते. उन्होंने अपने अगले लक्ष्य के बारे में भी बताया है. धर्मेंद्र ने कहा कि उन्होंने अपनी मां का लंबा संघर्ष अपनी आंखों से देखा है.
उनकी मां वर्षों से पुलिसकर्मियों की खाकी वर्दी धोती रही हैं. इसी मेहनत से उन्होंने बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया. अब धर्मेंद्र का सपना है कि उनकी मां एक दिन उन्हें खुद खाकी वर्दी में देखें.
धर्मेंद्र ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य BPSC की आगामी परीक्षा पास कर DSP बनना है. वह चाहते हैं कि जिस मां ने वर्षों तक दूसरों की खाकी वर्दी धोकर उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया, वही मां एक दिन अपने बेटे को खाकी वर्दी में देखकर गर्व महसूस करे.
धर्मेंद्र की कहानी सिर्फ एक सरकारी नौकरी हासिल करने की कहानी नहीं है. यह उस मां की मेहनत की कहानी है, जिसने मुश्किल हालात में भी बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया. अब बेटे की सफलता ने उनकी वर्षों की मेहनत को एक नई पहचान दी है.
