Bihar Politics: बिहार की सियासत में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने जो हलचल पैदा की थी, वह अब कांग्रेस के भीतर एक बड़े ‘तूफान’ में बदल गई है. अनुशासनात्मक कार्रवाई के डर से झुकने के बजाय, बागी विधायकों ने कांग्रेस आलाकमान को भेजे अपने जवाब में बेहद तल्ख तेवर दिखाए हैं.
पार्टी नेतृत्व द्वारा जारी ‘कारण बताओ नोटिस’ का जवाब देते हुए इन बागियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए प्रदेश नेतृत्व की रणनीति को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है.
नोटिस का जवाब, लेकिन तेवर बरकरार
कांग्रेस ने मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेंद्र प्रसाद और मनोज विश्वास को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था.
लेकिन जवाब में इन विधायकों ने अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय प्रदेश नेतृत्व को ही जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने चुनाव के दौरान रणनीतिक चूक और समन्वय की कमी का आरोप लगाया है.
राज्यसभा चुनाव में कैसे बिगड़ा खेल
राज्यसभा चुनाव में पार्टी लाइन से हटकर कदम उठाने वाले विधायक मनोहर प्रसाद सिंह (मणिकारी), सुरेंद्र प्रसाद (वाल्मीकिनगर) और मनोज विश्वास (फारबिसगंज) को कांग्रेस ने दो दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा था. इन विधायकों ने अपने जवाब में माफी मांगने के बजाय सीधा हमला बोला है.
उन्होंने आरोप लगाया है कि चुनाव के दौरान पार्टी के पास न तो कोई ठोस रणनीति थी और न ही विधायकों के बीच तालमेल बिठाने की कोई गंभीर कोशिश की गई.
एनडीए की जीत ने बदले सियासी समीकरण
चुनाव के नतीजों ने बिहार के कई बड़े चेहरों को दिल्ली की राजनीति का रास्ता दिखा दिया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (जदयू) अब राज्यसभा के जरिए एक नई भूमिका में नजर आएंगे. उनके साथ ही भाजपा के दिग्गज नेता नितिन नबीन और प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार ने भी जीत दर्ज की है. जदयू के रामनाथ ठाकुर और आरएलएम के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने भी अपनी सीट पक्की कर ली है. इस क्लीन स्वीप ने जहां एनडीए के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है.
अब हाईकमान के फैसले पर नजर
कांग्रेस हाईकमान के पास अब विधायकों के जवाब पहुंच चुके हैं. ऐसे में सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी क्या कड़ा कदम उठाएगी या फिर कोई नरम रास्ता अपनाया जाएगा. यदि कार्रवाई होती है तो इसका असर आगामी चुनावी रणनीति पर भी पड़ सकता है.
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