पटना से कृष्ण कुमार की रिपोर्ट
Bihar News: बिहार में पत्थर खनन गतिविधियों को फिर से शुरू करने की तैयारी तेज हो गयी है. राज्य के सात जिलों में बरसात के बाद पत्थर खनन शुरू कराने की दिशा में खान एवं भूतत्व विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की है. शेखपुरा, गया, रोहतास, औरंगाबाद, कैमूर तथा बांका जिलों के लिए डिस्ट्रिक्ट सर्वे रिपोर्ट (डीएसआर) तैयार कर ली गयी है, जबकि नवादा जिले के डीएसआर को विभागीय मंजूरी भी मिल चुकी है. इन सभी जिलों में अब जल्द ही ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू होगी.
जानकारी के मुताबिक, सातों जिलों में कुल 31 पत्थर खदानों से खनन कार्य संचालित किया जाना प्रस्तावित है. विभाग का मानना है कि खदानों की ई-नीलामी से पारदर्शिता बढ़ेगी. साथ ही सरकार को राजस्व की भी प्राप्ति होगी. निर्माण कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर पत्थर की उपलब्धता सुनिश्चित होने से विकास योजनाओं की गति भी तेज होगी. अब तक राज्य में पत्थर का खनन बहुत कम मात्रा में होने से इसे पड़ोसी राज्यों से मंगवाया जाता था.
डीएसआर में हर पहलुओं का अध्ययन शामिल
सूत्रों के अनुसार खान एवं भूतत्व विभाग की तरफ से डीएसआर में पर्यावरणीय मानकों, भूगर्भीय स्थिति, खनिज भंडार और आसपास के क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया जाता है. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही खनन पट्टों की ई-नीलामी की जायेगी. साथ ही बरसात समाप्त होने के बाद फेज वाइज खनन कार्य शुरू कराया जायेगा.
स्थानीय स्तर पर विकसित होंगे रोजगार के अवसर
विशेषज्ञों का कहना है कि इन जिलों में पत्थर खनन शुरू होने से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे. ट्रांसपोर्ट, क्रशर उद्योग और निर्माण क्षेत्र से जुड़े बड़ी संख्या में लोगों को इसका सीधा लाभ मिलने की संभावना है. लंबे समय से खनन गतिविधियां प्रभावित रहने के कारण निर्माण सामग्री की कीमतों में भी असर देखा जा रहा था.
ऐसे में खनन शुरू होने से बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है. विभाग की ओर से यह भी संकेत मिले हैं कि ई-नीलामी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से संचालित होगी. इससे अवैध खनन और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा.
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