Bihar News: 24 जनवरी 2026 को ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनियों की समीक्षा बैठक हुई. इसमें बिजली व्यवस्था को ज्यादा जवाबदेह, पारदर्शी और आमलोगों के हितैषी बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए.
सबसे बड़ा फैसला यह है कि अब हर बिजली बिल पर उस एरिया के कॉल सेंटर का मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से छापा जाएगा, ताकि बिजली गुल होने या फॉल्ट की स्थिति में लोग सीधे उसी टीम से संपर्क कर सकें जो मौके पर कार्रवाई करती है.
अब बिल ही बनेगा शिकायत का सबसे आसान रास्ता
बिजली ट्रिप होने या फॉल्ट की स्थिति में लोग यह तय नहीं कर पाते कि शिकायत कहां करें. कॉल सेंटर, स्थानीय कार्यालय और लाइनमैन के बीच तालमेल की कमी से समस्या और बढ़ जाती है.
नए सिस्टम में बिजली बिल पर छपा कॉल सेंटर का नंबर लोगों के लिए सीधा और भरोसेमंद संपर्क सूत्र बनेगा. इससे शिकायत दर्ज कराने में लगने वाला समय कम होगा और समस्या के समाधान में तेजी आएगी.
ऑनलाइन पोर्टल से होगी शिकायतों की रियल टाइम निगरानी
बिजली विभाग ने पहली बार मुख्यालय स्तर पर एकीकृत ऑनलाइन शिकायत पोर्टल विकसित करने का फैसला लिया है. इस पोर्टल पर राज्य के सभी बिजली अंचलों से जुड़ी शिकायतें दर्ज होंगी. जैसे ही कोई व्यक्ति शिकायत दर्ज करेगा, उसे एक यूनिक आईडी मिलेगी. इसी आईडी के जरिए वह मोबाइल या कंप्यूटर पर यह देख सकेगा कि उसकी शिकायत किस स्तर पर है, किस अधिकारी के पास लंबित है और कब तक समाधान होने की संभावना है. इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय होगी.
बैठक में यह भी तय हुआ कि स्मार्ट मीटर से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण कर बिजली आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाएगा. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि किन इलाकों में बार-बार फॉल्ट आ रहे हैं, कहां ओवरलोड की समस्या है और कहां मेंटेनेंस की ज्यादा जरूरत है. तकनीक के जरिए अब बिजली व्यवस्था को ज्यादा वैज्ञानिक और भरोसेमंद बनाने की तैयारी है.
31 मार्च तक ग्रिड और डीटीआर दुरुस्त करने का लक्ष्य
गर्मी के मौसम में बढ़ने वाली बिजली मांग को देखते हुए ऊर्जा सचिव ने साफ निर्देश दिया है कि 31 मार्च 2026 तक सभी ग्रिड, पावर सब-स्टेशन, डीटीआर, फीडर और अन्य विद्युत संरचनाओं का मेंटेनेंस पूरा किया जाए. इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने को कहा गया है. उद्देश्य यह है कि गर्मी में बिजली कटौती और तकनीकी फॉल्ट की समस्या से उपभोक्ताओं को कम से कम जूझना पड़े.
उपभोक्ता सुविधा और जवाबदेही पर फोकस
इस पूरी कवायद का मकसद सिर्फ तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि आम लोगों का भरोसा जीतना है. जब शिकायत दर्ज करने से लेकर समाधान तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी, तो बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली पर भी सकारात्मक दबाव बनेगा. इससे बिजली व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ आम लोगों को यह भरोसा मिलेगा कि उनकी आवाज सुनी जा रही है.
बिजली बिल पर फ्यूज कॉल सेंटर नंबर, एकीकृत ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और 31 मार्च तक ग्रिड-डीटीआर दुरुस्त करने का लक्ष्य, ये तीनों फैसले मिलकर बिहार की बिजली व्यवस्था को नई दिशा देने वाले साबित हो सकते हैं. आने वाले महीनों में इसका असर जमीन पर कितना दिखता है, यही सबसे बड़ी कसौटी होगी.
