Bihar News: बिहार की सड़कों की सूरत अब पूरी तरह बदलने वाली है. नीतीश सरकार ने राज्य के परिवहन ढांचे को मजबूती देने के लिए एक महायोजना तैयार की है, जिसके तहत करीब 3000 किलोमीटर लंबी जिला सड़कों (MDR) को स्टेट हाइवे का दर्जा दिया जाएगा.
पथ निर्माण विभाग ने इसकी कवायद तेज कर दी है. इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिहार के किसी भी कोने से राजधानी पटना पहुंचना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा.
जिलों से राजधानी तक कनेक्टिविटी मजबूत करने की तैयारी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की “तीन घंटे में पटना” विजन योजना को ध्यान में रखते हुए सड़क नेटवर्क को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है. पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल के अनुसार स्टेट हाईवे की लंबाई बढ़ने से लोगों को जाम से राहत मिलेगी और व्यापारिक परिवहन तेज होगा.
वर्तमान में बिहार में सबसे अधिक लंबाई मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड की है, जबकि स्टेट हाईवे सबसे कम हैं. कई वर्षों तक राज्य की सड़कों को सीधे नेशनल हाईवे में अपग्रेड करने की वजह से स्टेट हाईवे नेटवर्क छोटा रह गया. अब सरकार चाहती है कि राज्य का आंतरिक सड़क ढांचा मजबूत हो, ताकि जिलों के बीच आवागमन बेहतर बने.
नेशनल हाईवे से भी कम रह गई थी स्टेट हाईवे की लंबाई
बिहार में सड़क नेटवर्क का एक अजीब आंकड़ा सामने आया है. राज्य में नेशनल हाईवे (NH) की कुल लंबाई 6392 किलोमीटर है, जबकि स्टेट हाईवे (SH) महज 3617 किलोमीटर ही रह गए हैं. इसकी मुख्य वजह यह रही कि पिछले वर्षों में कई स्टेट हाईवे को अपग्रेड कर नेशनल हाईवे बना दिया गया.
अब सरकार का लक्ष्य इस असंतुलन को दूर करना है. पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल के अनुसार, एसएच की लंबाई बढ़ने से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि मुख्यमंत्री की ‘3 घंटे में पटना’ वाली महत्वाकांक्षी योजना भी धरातल पर उतरेगी.
सख्त मानकों पर ही मिलेगा हाईवे का दर्जा
सड़क को स्टेट हाईवे बनाने के लिए उसे भारतीय मानकों पर खरा उतरना होगा. निर्माण और डिजाइन इंडियन रोड कांग्रेस के नियमों के अनुसार किया जाएगा. ऐसी सड़कें चुनी जाएंगी जो राजधानी को जिला मुख्यालयों से जोड़ें, दो राष्ट्रीय राजमार्गों के बीच लिंक बनें या प्रमुख शहरों को जोड़ती हों.
इन सड़कों की चौड़ाई कम से कम दो लेन यानी लगभग सात से साढ़े सात मीटर होगी. भविष्य में चौड़ीकरण के लिए जमीन अधिग्रहण भी पहले से किया जाएगा, ताकि सड़कें ट्रैफिक बढ़ने पर बाधा न बनें.
विभाग पहले भी सड़कों की सूची तैयार कर चुका था, लेकिन उच्चस्तरीय समीक्षा में कई सड़कें मानक पर खरी नहीं उतरीं और सूची वापस कर दी गई. अब दोबारा सख्त जांच के बाद ही अंतिम सूची जारी होगी, ताकि घोषित सड़कें वास्तव में हाईवे की गुणवत्ता वाली हों.
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