Bihar News: नये साल में शोध का नया केंद्र बनेगा बिहार, आइआइटी पटना देगा सुपर कंप्यूटर ‘परम रुद्र’ को नयी रफ्तार

Bihar News: यह सुविधा इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, जलवायु परिवर्तन, मौसम पूर्वानुमान, डिजास्टर मैनेजमेंट, बायोटेक्नोलॉजी, मैकेनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग जैसे अनेक क्षेत्रों में नयी संभावनाएं खोलेगी.

Bihar News: पटना: अनुराग प्रधान. नये साल में बिहार का शोध परिदृश्य बदलेगा. आइआइटी पटना का सुपर कंप्यूटर ‘परम रुद्र’ इसे नयी रफ्तार देगा. यह उपलब्धि केवल तकनीकी नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का दरवाजा खोलने वाली पहल है. विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आइआइटी पटना अब और दमदार भूमिका निभायेगा. इस प्रकार कहा जा सकता है कि 2026 बिहार और आइआइटी पटना के लिए तकनीकी पुनर्जागरण का साल साबित होगा. आइआइटी पटना परिसर में राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत देश के अत्याधुनिक सुपर कंप्यूटर ‘परम रुद्र’ के सक्रिय हो जाने के बाद अब वैज्ञानिक शोध, उच्चस्तरीय अध्ययन, डेटा एनालिसिस और इंडस्ट्री आधारित प्रोजेक्ट्स को नयी उड़ान मिलेगी.

जटिल वैज्ञानिक गणनाएं पूरी की जा सकेंगी

यह सुपर कंप्यूटर न केवल आइआइटी पटना के शोधकर्ताओं के लिए, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के तकनीकी और वैज्ञानिक समुदाय के लिए ऐतिहासिक अवसर साबित होगा. आइआइटी पटना प्रशासन के अनुसार ‘परम रुद्र’ की स्थापना से संस्थान के करीब 10 विभागों और 60 से अधिक फैकल्टी मेंबर सीधे लाभान्वित होंगे. लगभग 400 शोधार्थियों को उच्च स्तरीय कंप्यूटिंग सुविधा मिल सकेगी, जिससे रिसर्च पेपर्स, प्रयोगों के परिणाम, सिमुलेशन और जटिल वैज्ञानिक गणनाएं पहले से कई गुना तेज और सटीक तरीके से पूरी की जा सकेंगी. यह सुविधा इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, जलवायु परिवर्तन, मौसम पूर्वानुमान, डिजास्टर मैनेजमेंट, बायोटेक्नोलॉजी, मैकेनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग जैसे अनेक क्षेत्रों में नयी संभावनाएं खोलेगी.

बदलता शोध का कल्चर

अब तक शोधकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारी डेटा, सीमित कंप्यूटिंग क्षमता और समय की कमी रही थी. लेकिन, अब ‘परम रुद्र’ के आने से इस स्थिति में व्यापक परिवर्तन होगा. नये साल से आइआइटी पटना न केवल स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर बल्कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ भी तेज और आधुनिक शोध सहयोग कर सकेगा. इससे बिहार का नाम वैश्विक शोध मानचित्र पर और मजबूत होगा. आइआइटी पटना के विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 बिहार की टेक्नोलॉजी और शोध यात्रा का नया अध्याय साबित होगा. सुपर कंप्यूटर के माध्यम से छात्रों और युवा वैज्ञानिकों को विश्वस्तरीय प्रयोगशालाओं जैसा वातावरण उपलब्ध होगा. सबसे खास बात यह है कि यह सुविधा सिर्फ लैब तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उद्योग, स्वास्थ्य, कृषि और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के लिए भी अहम साबित होगी.

छात्रों और युवाओं के लिए बड़ा अवसर

आइआइटी पटना प्रशासन का कहना है कि इस सुविधा के खुलने से छात्रों की प्रैक्टिकल सीखने की क्षमता कई गुनी बढ़ेगी. शोध परियोजनाओं में उन्हें ज्यादा सटीक परिणाम मिलेंगे, जिससे पेटेंट, इनोवेशन और नयी तकनीकी खोजों का रास्ता और आसान होगा. बिहार के उन छात्रों के लिए भी यह प्रेरणा का बड़ा स्रोत बनेगा, जो बड़े शहरों में जाये बिना विश्वस्तरीय टेक्नोलॉजी से जुड़ना चाहते हैं.

सरकार और संस्थान का साझा विजन

आइआइटी पटना के निदेशक प्रो टीएन सिंह ने कहा है कि राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन का उद्देश्य भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षमता देना है. आइआइटी पटना में ‘परम रुद्र’ की स्थापना इसी दिशा में उठाया गया सशक्त कदम है. आने वाले समय में देश भर में 100 से अधिक सुपर कंप्यूटरों का मजबूत नेटवर्क तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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